नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान ने रविवार को लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे पर हमले नहीं किए। लगभग दो हफ्ते तक चले तनाव के बाद आई इस रुकावट को मध्यस्थों ने अंतरिम सीज़फायर डील को पटरी पर लाने के मौके के तौर पर देखा है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम और जलमार्गों को लेकर बड़े मुद्दे अब भी सुलझे नहीं हैं।
तनाव की शुरुआत जून के मध्य में हुई थी, जब ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर गोलीबारी की थी। इसके बाद दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई हुई। जून में हुई अंतरिम डील के तहत 60 दिन का समय तय हुआ था, और अभी उसका दूसरा हिस्सा चल रहा है। अमेरिका ने अचानक अपने हमले क्यों रोके, इस पर पेंटागन ने रविवार को कोई टिप्पणी नहीं की।
व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन चेउंग ने कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। लेकिन अगर ईरान होर्मुज़ में या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां करता है तो सभी विकल्प खुले हैं। ईरान के लिए समझौते की दिशा में काम करना बेहतर होगा। वरना उसे अंजाम पता है।"
ईरान की सेना के प्रवक्ता ने सरकारी टीवी पर कहा कि अमेरिका ने पिछली दो रात हमले रोके, इसलिए ईरान ने भी रोक दिए। हाल में ईरान ने उन देशों के खिलाफ जवाबी हमले किए थे जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। जॉर्डन में एक बेस पर हुए हमले में कम से कम 3 लोग मारे गए थे।
एक क्षेत्रीय अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि हमलों में ठहराव "तनाव कम करने में मदद करने वाला सकारात्मक संकेत है"। दोनों देश अंतरिम सीज़फायर पर वापस लौटना चाहते हैं। बातचीत का फोकस इस पर है कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को कम प्रतिबंधों के साथ मैनेज करे।
ईरान ने कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज़ से सुरक्षित शिपिंग को लेकर बात कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि बातचीत में प्रगति हुई है और यह जारी है। तेहरान का कहना है कि अंतरिम समझौते के तहत उसे फिलहाल वहां शिपिंग मैनेज करने की इजाजत है।
अमेरिकी सेना ने शनिवार को बताया कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जारी है। इसके तहत 12 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया, 2 को रोका गया और 2 पर कब्जा किया गया। सेना ने कहा कि वह "पूरी तरह सतर्क और तैयार" है।
होर्मुज़ के साथ-साथ लाल सागर जाने वाले बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता है। यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने पिछले हफ्ते सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने की धमकी दी थी। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार को वाशिंगटन में ट्रंप से मिलेंगे। उनकी पिछली मुलाकात फरवरी में हुई थी, ईरान के साथ युद्ध से कुछ हफ्ते पहले। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को बताया कि वह ईरान को कमजोर करने और परमाणु कार्यक्रम खत्म कराने की ट्रंप की कोशिशों का "पूरी तरह" समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर यह भारी सैन्य संघर्ष के बिना हो जाए तो बेहतर है। लेकिन चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने सीधे या प्रॉक्सी के जरिए फिर हमला किया तो "वह बहुत बड़ी गलती करेगा"। फिलहाल हमलों के रुकने से कूटनीति के लिए जगह बनी है, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम और जलमार्गों की सुरक्षा जैसे मुख्य मुद्दे अब भी लटके हुए हैं। First Updated : Sunday, 26 July 2026