ईरान पर ट्रंप का सबसे बड़ा हमला, मशहद जाने वाले रास्ते के दो पुलों को अमेरिका ने उड़ाया, मचा हड़कंप
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी वायुसेना ने पवित्र शहर मशहद जाने वाले दो प्रमुख रेलवे पुलों को बमबारी कर उड़ा दिया है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में स्थिति बेहद विस्फोटक हो चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब सीधे युद्ध में बदलता दिखाई दे रहा है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी वायुसेना ने पवित्र शहर मशहद जाने वाले दो प्रमुख रेलवे पुलों को बमबारी कर उड़ा दिया है.
कब हुआ हादसा
यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील समय पर किया गया है, जब ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की अंतिम चरण की तैयारियां चल रही हैं और उनका पार्थिव शरीर मशहद लाया जा रहा है. इस कार्रवाई से भड़के ईरान ने भी जवाबी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए हैं.
क्रूज मिसाइल से तबाही
आईआरजीसी ने अपने कड़े बयान में अमेरिका को "विश्वासघाती" करार देते हुए आरोप लगाया कि दक्षिणी ईरान में बमबारी करने के साथ-साथ अमेरिकी सेना ने देश के पूर्वी हिस्से को निशाना बनाया है. उनका मुख्य मकसद उन दो रेल पुलों को ध्वस्त करना था, जो मशहद तक पहुंचने का मुख्य जरिया हैं, ताकि खामेनेई की अंतिम विदाई यात्रा को रोका या प्रभावित किया जा सके.
रेलवे ब्रिज पर तड़के एक जोरदार धमाका
इरानी मीडिया के मुताबिक, उत्तरी-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित 'आक तेकेह खान' रेलवे ब्रिज पर तड़के एक जोरदार धमाका हुआ. आईआरजीसी की क्षेत्रीय इकाई 'नयनावा कॉर्प्स' ने दावा किया कि इस पुल को अमेरिकी क्रूज मिसाइल से उड़ाया गया है. हमले के बाद इलाके में दो भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. हालांकि, इस घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया ने भी प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से उत्तरी और उत्तर-पूर्वी ईरान में दो पुलों पर हमले की पुष्टि की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने के लिए की गई है, जिससे वह होर्मुज जलडमरू मध्य में खतरा पैदा करता है.
ईरान का पलटवार
अमेरिकी हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने अपनी आक्रामकता दिखाते हुए इसे 'पहला दंडात्मक चरण' घोषित किया और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. आईआरजीसी ने दावा किया है कि उन्होंने कुवैत में स्थित 'अरिफजान कैंप' और 'अली अल सलेम एयर बेस' के साथ-साथ बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के 'जुफैर' बेस और 'शेख ईसा एयर बेस' पर आत्मघाती ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है.
मशहद में लाखों की भीड़
इस भारी सैन्य तनाव और गोलाबारी के बीच, ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए मशहद की सड़कों पर लाखों की तादाद में लोग उमड़ पड़े हैं. इराक के पवित्र शहरों में अंतिम यात्रा पूरी होने के बाद खामेनेई का ताबूत मशहद पहुंच चुका है. सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजामों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को देखते हुए मशहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. दरगाह के आसपास की सभी सड़कों पर आम वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है. ईरान ने साफ कर दिया है कि इस्लाम के लड़ाके अमेरिकी आक्रामकता का बदला लेकर रहेंगे.


