नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने दुनिया को हिला दिया है. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर हमले के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया. जहां रूस और चीन जैसे देश ईरान के साथ खड़े हैं, वहीं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपना रुख साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि इटली इस युद्ध में किसी भी तरफ से सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेगा. बल्कि, शांतिपूर्ण बातचीत से समस्या सुलझाने की कोशिश करेगा.
बुधवार को इटली की संसद में बोलते हुए मेलोनी ने कहा कि उनका देश ईरान पर हो रहे अमेरिकी और इजरायली हमलों में शामिल नहीं होगा. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए बड़ा खतरा बताया. मेलोनी ने विपक्ष से अपील की कि वे देशहित में सरकार का साथ दें. उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले इटली ने कतर और ओमान जैसे देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई रोकने की कोशिश की थी.
साथ ही, तेहरान के साथ पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल इटली ने परमाणु मुद्दे पर दो दौर की बातचीत की मेजबानी की थी. मेलोनी का मानना है कि यह संकट इतिहास के सबसे मुश्किल दौरों में से एक है. एनर्जी संकट पर इटली की चिंतायुद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है.
मेलोनी ने चेतावनी दी कि सरकार उन कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करेगी जो मुनाफाखोरी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो ऐसे फर्मों पर अतिरिक्त टैक्स लगाए जाएंगे. हालांकि, उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी. इटली की यह नीति दिखाती है कि वह युद्ध के आर्थिक प्रभावों से निपटने को तैयार है, लेकिन सैन्य तरीके से नहीं.
चीन ने भी इस युद्ध पर अपनी प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन खाड़ी क्षेत्र में हमलों का विरोध करता है. वे नागरिकों और गैर-सैन्य जगहों पर अंधाधुंध हमलों की निंदा करते हैं. चीन ने कहा कि वह तनाव कम करने और शांति बहाल करने में रचनात्मक भूमिका निभाएगा. सभी पक्षों से सहयोग बढ़ाने की बात कही गई.
युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों पर हमले किए, जिसमें तेहरान भी शामिल था. जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है. हाल ही में दुबई से 50 मील दूर एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जो क्षेत्र में तीसरा ऐसा मामला है. ब्रिटिश मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक, चालक दल सुरक्षित है और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. First Updated : Wednesday, 11 March 2026