नई दिल्ली: ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां आम नागरिकों का वैश्विक दुनिया से डिजिटल संपर्क लगभग खत्म हो सकता है. डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं और निगरानी संगठनों का दावा है कि ईरानी सरकार इंटरनेट को नागरिकों का मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक नियंत्रित सरकारी सुविधा बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. अगर यह योजना लागू होती है, तो देश के अधिकांश लोग केवल सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय इंटरनेट तक ही सीमित रह जाएंगे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम ईरान की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सूचना के प्रवाह पर पूरी तरह नियंत्रण की कोशिश की जा रही है. सरकार के संकेत बताते हैं कि आने वाले वर्षों में खुला और स्वतंत्र वैश्विक इंटरनेट ईरान में बीते दौर की बात बन सकता है.
इंटरनेट सेंसरशिप पर नज़र रखने वाली संस्था फिल्टरवॉच के अनुसार, यह योजना अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से पर्दे के पीछे तैयार की जा रही है. इसके तहत भविष्य में केवल वही लोग वैश्विक इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे, जिन्हें सरकार की ओर से विशेष सुरक्षा मंजूरी दी जाएगी या जो आधिकारिक जांच प्रक्रिया में पास होंगे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 के बाद खुले इंटरनेट की वापसी की संभावना बेहद कम नजर आ रही है.
ईरान में 8 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद है. यह फैसला सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिनमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आईं.
इस लंबी और कठोर इंटरनेट बंदी की तुलना 2011 के मिस्र के तहरीर स्क्वायर आंदोलन के दौरान की गई बंदिशों से की जा रही है. सरकार का आधिकारिक रुख है कि अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कम से कम 20 मार्च तक बंद रहेगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान पहले से ही 'व्हाइटलिस्टिंग' तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इसके तहत कुछ चुने हुए व्यक्तियों को सीमित और फ़िल्टर किया हुआ वैश्विक इंटरनेट मिलता है, जबकि आम नागरिक पूरी तरह इससे वंचित रहते हैं.
शोधकर्ताओं का दावा है कि इस प्रणाली में चीनी तकनीक की मदद ली गई है, जिससे सरकार पूरे देश के इंटरनेट ट्रैफिक पर कड़ी निगरानी रख सकती है.
अमेरिकी विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने इस योजना को "डराने वाली और बेहद महंगी" करार दिया है. उनका कहना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और देश का सांस्कृतिक व सामाजिक जुड़ाव दुनिया से टूट जाएगा.
डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को भले ही अल्पकाल में नियंत्रण मिल जाए, लेकिन लंबे समय में इसकी कीमत ईरानी समाज और आम जनता को चुकानी पड़ेगी.
First Updated : Saturday, 17 January 2026