नई दिल्ली: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. इनमें से एक है पीरियड्स के अलावा होने वाली वजाइनल ब्लीडिंग. कई बार महिलाएं इसे हार्मोनल बदलाव या थकान का असर मानकर डॉक्टर से सलाह लेने में देर कर देती हैं. हालांकि, यह समस्या कुछ मामलों में गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों का संकेत भी हो सकती है. खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली असामान्य ब्लीडिंग को हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है.
जब किसी महिला को दो पीरियड्स के बीच रक्तस्राव हो, शारीरिक संबंध बनाने के बाद ज्यादा ब्लीडिंग हो, सामान्य से अधिक पीरियड्स आएं या मेनोपॉज के बाद भी रक्तस्राव हो, तो इसे एबनॉर्मल ब्लीडिंग माना जाता है. कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान भी हल्की या ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है. यह समस्या कभी केवल स्पॉटिंग के रूप में दिखाई देती है, जबकि कुछ मामलों में रक्तस्राव काफी ज्यादा हो सकता है. यदि यह स्थिति बार-बार हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.
महिलाओं की मासिक धर्म प्रक्रिया मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है. जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत प्रभावित होती है और अनियमित रक्तस्राव शुरू हो सकता है.
हार्मोनल असंतुलन कई कारणों से हो सकता है, जैसे-
लगातार तनाव में रहना
अचानक वजन बढ़ना या कम होना
जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना
गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल
किशोरावस्था या मेनोपॉज का समय
इन परिस्थितियों में पीरियड्स का चक्र प्रभावित हो सकता है और बीच-बीच में ब्लीडिंग की समस्या देखने को मिल सकती है.
कई बार वजाइना या सर्विक्स में संक्रमण होने पर भी रक्तस्राव की समस्या हो सकती है. यीस्ट इन्फेक्शन, बैक्टीरियल संक्रमण या यौन संचारित संक्रमण (STI) इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं. संक्रमण के कारण सूजन और जलन बढ़ जाती है, जिससे ब्लीडिंग होने लगती है.
इसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं-
खुजली या जलन
बदबूदार डिस्चार्ज
पेशाब करते समय दर्द
शारीरिक संबंध के दौरान असुविधा
कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी असामान्य रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं. यदि ब्लीडिंग के साथ पेट या पेल्विक एरिया में दर्द, कमजोरी या असामान्य डिस्चार्ज हो रहा है, तो तुरंत जांच करानी चाहिए.
फाइब्रॉइड: गर्भाशय में बनने वाली गैर-कैंसर गांठें, जिनसे भारी ब्लीडिंग और दर्द हो सकता है.
पॉलीप्स: गर्भाशय या सर्विक्स में बनने वाले छोटे उभार, जो बीच-बीच में रक्तस्राव का कारण बनते हैं.
एंडोमेट्रियोसिस: इस स्थिति में गर्भाशय की परत जैसी कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगती हैं, जिससे दर्द और ब्लीडिंग होती है.
पीसीओएस (PCOS): यह हार्मोनल समस्या पीरियड्स को अनियमित बना सकती है और बीच में ब्लीडिंग का कारण बन सकती है.
गर्भावस्था के शुरुआती समय में हल्की ब्लीडिंग कभी-कभी सामान्य हो सकती है, लेकिन अधिक रक्तस्राव खतरे का संकेत हो सकता है. यह गर्भपात, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या अन्य जटिलताओं की ओर इशारा कर सकता है. इसलिए गर्भावस्था में किसी भी तरह की असामान्य ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
महिलाओं की दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य भी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करते हैं. पर्याप्त नींद न लेना, तनाव, असंतुलित खानपान और अत्यधिक व्यायाम हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकते हैं. स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
पीरियड्स के अलावा होने वाली ब्लीडिंग के पीछे कई कारण हो सकते हैं. कुछ मामलों में यह सामान्य हार्मोनल बदलाव का हिस्सा होती है, लेकिन कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी बन सकती है. इसलिए इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है.
यदि बार-बार ब्लीडिंग हो रही हो, रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो, पेल्विक हिस्से में तेज दर्द हो, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो या गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. समय पर पहचान और सही इलाज महिलाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. First Updated : Tuesday, 02 June 2026