नई दिल्ली: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अच्छी और गहरी नींद लेना कई लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. पहले लोग नींद न आने के पीछे मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल या मानसिक तनाव को जिम्मेदार मानते थे, लेकिन अब विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है. दिनभर फिट रहने और हेल्दी खाने की कोशिश करने के बाद भी रात में देर तक मोबाइल स्क्रॉल करना, वेब सीरीज देखना या बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना नींद के पैटर्न को बिगाड़ देता है.
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे ‘बटर हैक’ कहा जा रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि सोने से पहले थोड़ा सा मक्खन खाने से बेहतर नींद आ सकती है. कई लोग इसे आसान उपाय बताकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, लेकिन क्या यह सच में कारगर है? आइए जानते हैं विशेषज्ञ इस बारे में क्या कहते हैं.
हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा काफी वायरल हो रहा है कि सोने से पहले थोड़ी मात्रा में मक्खन खाने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है. कई लोग इसे प्राकृतिक और सरल उपाय बताते हुए अपनाने की सलाह दे रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेंड को समझने के लिए वैज्ञानिक तथ्यों को जानना जरूरी है.
एक्सपर्ट्स बताते है कि यह ट्रेंड मुख्य रूप से बायोहैकिंग और वेलनेस ब्लॉग्स से सामने आया है. उनके अनुसार, सोने से पहले फैट लेने से कुछ मामलों में ब्लड शुगर का स्तर रातभर स्थिर रह सकता है और देर रात भूख लगने की संभावना कम हो सकती है. यह विचार कीटो और लो-कार्ब डाइट से भी जुड़ा है, जहां शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने के लिए फैट का उपयोग किया जाता है. हालांकि सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे अधिकतर लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं और अभी तक इसके समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.
विशेषज्ञों का कहना है की अब तक नींद से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि केवल मक्खन खाने से नींद बेहतर हो जाती है. उनका कहना है कि यह ट्रेंड इसलिए तेजी से फैल रहा है क्योंकि लोग नींद की समस्या का आसान समाधान तलाशते रहते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों के लिए सोने से पहले हल्का भोजन लेना फायदेमंद हो सकता है. यदि कोई व्यक्ति खाली पेट सोता है, तो रात में भूख के कारण उसकी नींद टूट सकती है. ऐसे में थोड़ी मात्रा में फैट या प्रोटीन लेने से पेट भरा हुआ महसूस होता है और नींद में व्यवधान कम हो सकता है. हालांकि इसके लिए मक्खन ही जरूरी नहीं है. नट्स, दही, पनीर या दूध जैसे विकल्प भी उतने ही प्रभावी हो सकते हैं.
डॉक्टरों के अनुसार मक्खन में मौजूद अधिक मात्रा में फैट पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को लंबे समय तक भूख नहीं लगती. हालांकि हर व्यक्ति के लिए यह तरीका उपयुक्त नहीं होता. अधिक फैट के कारण कुछ लोगों को एसिडिटी या पाचन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. खासकर जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग या लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या है, उन्हें इस तरह के ट्रेंड अपनाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. First Updated : Friday, 06 March 2026