जम्मू का रघुनाथ बाजार राम मंदिर: जहां दीवारों पर चमकती है असली सोने की परत
इस भव्य मंदिर का निर्माण 1835 में डोगरा राजा महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था। योजना इतनी बड़ी थी कि काम पूरा होने में दशकों लग गए। इसी दौरान महाराजा गुलाब सिंह का निधन हो गया।

श्रीनगर: अगर जम्मू का इतिहास और संस्कृति करीब से समझनी है तो रघुनाथ मंदिर को देखना जरूरी है। इतिहासकार दीवान नरसिंह दास नरगिस की किताब तारीख ए डोगरा देश में इस मंदिर के बनने की पूरी कहानी दर्ज है। डोगरा राजाओं ने इसे सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि जम्मू की संस्कृति और कला का सबसे बड़ा प्रतीक माना था। आज भी यह मंदिर डोगरा शिल्प और आस्था का जीता जागता उदाहरण है।
महाराजा गुलाब सिंह ने रखी थी नींव
इस भव्य मंदिर का निर्माण 1835 में डोगरा राजा महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था। योजना इतनी बड़ी थी कि काम पूरा होने में दशकों लग गए। इसी दौरान महाराजा गुलाब सिंह का निधन हो गया। उनके बाद उनके बेटे महाराजा रणबीर सिंह ने पिता का सपना पूरा किया।
लगातार काम चलने के बाद 1860 के आसपास मंदिर पूरी तरह तैयार हुआ। यानी इसे अपना मौजूदा रूप लेने में पूरे 25 साल लगे। इतने लंबे समय में बनी यह संरचना आज भी जम्मू की पहचान बनी हुई है।
डोगरा राजाओं के कुलदेवता का दरबार
मंदिर का मुख्य गर्भगृह भगवान राम को समर्पित है, जिन्हें यहां रघुनाथ जी कहा जाता है। रघुनाथ जी डोगरा राजवंश के कुलदेवता रहे हैं। अंदर कदम रखते ही माहौल में एक अलग ही शांति महसूस होती है।
मंदिर के ऊंचे शिखर दूर से ही नजर आ जाते हैं। यही वजह है कि माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालु भी यहां मत्था टेकने जरूर आते हैं। आज यह मंदिर पूरे जम्मू शहर की पहचान बन चुका है।
सोने से सजी दीवारें और बारीक नक्काशी
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारों पर चढ़ी असली सोने की परत है। गर्भगृह और अंदर के कमरों में की गई नक्काशी पर सोने की बारीक परत चढ़ाई गई है। सुबह और शाम की आरती के वक्त जब दीयों और सूरज की रोशनी इस पर पड़ती है तो पूरा मंदिर सोने की तरह चमक उठता है।
पत्थरों पर उकेरी गई देवी देवताओं की आकृतियां उस दौर के कारीगरों की कारीगरी का मुंह बोलता सबूत हैं। यही सोने की चमक मंदिर को बाकी जगहों से अलग बनाती है।
एक छत के नीचे सभी देवी देवता
रघुनाथ मंदिर परिसर का विशाल आंगन भी कम आकर्षक नहीं है। एक ही परिसर में शिव, दुर्गा, गणेश, राधा कृष्ण समेत हिंदू धर्म के लगभग सभी प्रमुख देवी देवताओं के छोटे मंदिर बनाए गए हैं।
इस वजह से इसे देवस्थानों का केंद्र भी कहा जाता है। भक्तों को एक ही जगह पर कई रूपों के दर्शन हो जाते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर आज भी देश और दुनिया में जम्मू को एक पवित्र पहचान देता है।


