Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के शिविर में नागा संन्यासियों की दीक्षा प्रक्रिया ने गंगा तट पर भक्तों का ध्यान खींच लिया. जूना अखाड़ा, जो नागा संन्यासियों की संख्या के मामले में सबसे बड़ा अखाड़ा है, इस बार 1500 से अधिक अवधूतों को नागा संन्यासी की दीक्षा दी. अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय मंत्री श्री महंत चैतन्य पुरी ने जानकारी दी कि यह प्रक्रिया शनिवार से प्रारंभ हुई.
नागा संन्यास - 12 वर्षों का इंतजार
आपको बता दें कि नागा दीक्षा का आयोजन केवल महाकुंभ में होता है. साधक को ब्रह्मचारी के रूप में तीन वर्षों तक गुरुओं की सेवा, धर्म-कर्म का पालन और अखाड़े के नियमों का पालन करना पड़ता है. इस अवधि में उनकी परीक्षा ली जाती है. योग्य पाए जाने पर उन्हें ब्रह्मचारी से महापुरुष और फिर अवधूत बनाया जाता है.
108 डुबकी और स्वयं का पिंडदान
वहीं आपको बता दें कि गंगा किनारे दीक्षा प्रक्रिया के दौरान साधकों का मुंडन कराया गया और उन्हें 108 बार गंगा में डुबकी लगवाई गई. इसके बाद स्वयं का पिंडदान और दंडी संस्कार भी संपन्न हुआ. दीक्षा के अंतिम चरण में अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर ने धर्म ध्वजा के नीचे उन्हें नागा संन्यासी के रूप में स्वीकार किया.
नागा संन्यासियों की पहचान
बताते चले कि नागा संन्यासियों को दीक्षा स्थान के आधार पर विशेष नाम दिए जाते हैं. उदाहरण के लिए, प्रयागराज में दीक्षा लेने वालों को ''राज राजेश्वरी नागा,'' उज्जैन के दीक्षितों को ''खूनी नागा,'' हरिद्वार में दीक्षा प्राप्त करने वालों को ''बर्फानी नागा,'' और नासिक के संन्यासियों को ''खिचड़िया नागा'' कहा जाता है. यह परंपरा उनकी विशिष्ट पहचान को दर्शाने के लिए बनाई गई है.
महाकुंभ में जूना अखाड़े की अहम भूमिका
इसके अलावा आपको बता दें कि महाकुंभ में जूना अखाड़े की छावनी, सेक्टर 20 में आस्था और परंपरा के प्रतीक के रूप में स्थापित है. नागा संन्यासियों की अलौकिक उपस्थिति और दीक्षा प्रक्रिया का दिव्य अनुभव यहां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनता है. First Updated : Sunday, 19 January 2025