AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली ने जनसंख्या बढ़ोतरी को लेकर दिया बड़ा बयान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने जनसंख्या बढ़ोतरी को लेकर एक बयान दिया, जिससे सियासी हलकों में हलचल मच गई.

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुरादाबाद जिले के रामपुर दोराहा इलाके में आयोजित एक जनसभा के दौरान जनसंख्या बढ़ोतरी को लेकर एक बयान दिया. इससे सियासी हलकों में हलचल मच गई. मंच से संबोधन करते हुए शौकत अली ने मुस्लिम समुदाय से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की और कहा कि 'हम दो, हमारे दो' की जगह 'हमारे दो दर्जन होने चाहिए.'

भाषण में क्या बोले शौकत अली?

अपने भाषण में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को खारिज करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी बड़ी आबादी में होती है. शौकत अली ने धार्मिक भावनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे ईश्वर की देन होते हैं और जब अल्लाह किसी को संतान का सुख देता है तो उसे रोकने की सोच नहीं रखनी चाहिए. उनका कहना था कि अधिक जनसंख्या से देश कमजोर नहीं होता, बल्कि मानव संसाधन बढ़ने से वह और मजबूत बनता है.

कुंवारे नेताओं पर साधा निशाना

जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर हमला बोलते हुए शौकत अली ने तीखा तंज कसा. उन्होंने कहा कि जो नेता खुद शादीशुदा नहीं हैं या जिनका अपना परिवार नहीं है वही दूसरों को परिवार सीमित रखने का उपदेश देते हैं. उनके इस बयान को सत्ता पक्ष के कुछ बड़े नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है.

इसके अलावा, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. शौकत अली ने कहा कि मदरसों की स्थापना शिक्षा के उद्देश्य से की गई है, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर उन्हें गलत नजरिए से पेश कर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

सपा पर जमकर बरसे

जनसभा के दौरान शौकत अली ने समाजवादी पार्टी को भी आड़े हाथों लिया. सपा के एक विधायक द्वारा AIMIM को भाजपा की ‘बी टीम’ बताए जाने पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि सपा अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी है और अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगा रही है. उन्होंने दावा किया कि मजलिस ही वह पार्टी है जो बिना डरे मुस्लिम समुदाय के हक की बात करती है.

बयान के बाद सियासी बवाल

शौकत अली के 'दो दर्जन' वाले बयान के बाद भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं और विकास जैसे अहम मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं. वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है. First Updated : Tuesday, 10 February 2026