Arvind Kejriwal: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद अब अरविंद केजरीवाल की नजरें पंजाब की राजनीति पर टिकी हुई हैं. दिल्ली में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आम आदमी पार्टी का एकमात्र मजबूत गढ़ पंजाब ही बचा है, जहां पार्टी की सरकार है. इसी के मद्देनजर केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधायकों के साथ एक अहम बैठक बुलाई है.
इस बैठक के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं? क्या दिल्ली की हार के बाद केजरीवाल पंजाब में नई सियासी पारी खेलने की तैयारी में हैं? आइए जानते हैं इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को विस्तार से.
दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को जबरदस्त हार मिली. 70 में से 48 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि 'आप' सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई. अरविंद केजरीवाल खुद नई दिल्ली सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा से हार गए. इस हार के बाद अब आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी रणनीति पंजाब पर केंद्रित कर दी है, क्योंकि यह वह इकलौता राज्य है, जहां AAP की सरकार अभी भी मजबूत है.
दिल्ली में सत्ता गंवाने के दो दिन बाद ही केजरीवाल ने पंजाब के विधायकों और मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ एक बैठक बुलाई. इस बैठक को दिल्ली चुनाव के नतीजों की समीक्षा बताया जा रहा है, लेकिन सूत्रों की मानें तो यह AAP की भविष्य की रणनीति तय करने वाली बैठक हो सकती है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केजरीवाल खुद पंजाब की कमान संभालने की योजना बना सकते हैं. भाजपा और कांग्रेस भी इस चर्चा को हवा दे रहे हैं. भाजपा नेताओं का दावा है कि दिल्ली चुनाव में हार के बाद केजरीवाल अब भगवंत मान को हटाकर खुद मुख्यमंत्री बनने का मन बना चुके हैं.
इस बात को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि पंजाब में आप के विधायकों के बीच असंतोष की खबरें भी सामने आ रही हैं. राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि दिल्ली की हार के बाद पंजाब की सरकार में भी भीतरखाने खींचतान शुरू हो गई है.
AAP सरकार के लिए पंजाब की लुधियाना सीट बेहद अहम मानी जा रही है. यह सीट इस समय खाली है, जिससे अटकलें तेज हैं कि केजरीवाल यहां से चुनाव लड़ सकते हैं और पंजाब में सरकार का नेतृत्व अपने हाथ में ले सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर केजरीवाल इस सीट से चुनाव लड़ते हैं और जीतते हैं, तो उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो सकता है. यह रणनीति AAP के पंजाब में भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया कदम भी हो सकता है.
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. पार्टी ने 13 में से केवल 3 सीटें ही जीतीं. ऐसे में अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी कमजोर पड़ती है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा. इसलिए केजरीवाल अब पंजाब को केंद्र बनाकर आगे की रणनीति बना सकते हैं. अगर AAP पंजाब में भी कमजोर होती है, तो पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का सपना अधूरा रह जाएगा.
क्या होगा आज की बैठक का असर?
आज होने वाली इस बैठक से यह साफ हो सकता है कि केजरीवाल पंजाब की राजनीति में किस हद तक भूमिका निभाने जा रहे हैं. हालांकि, 'आप' सांसद मलविंदर सिंह कंग ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नियमित रणनीति बैठक है. लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर केजरीवाल पंजाब में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला करते हैं, तो यह पंजाब की राजनीति के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है.
क्या केजरीवाल पंजाब में मुख्यमंत्री बन सकते हैं?
✔ दिल्ली चुनाव हारने के बाद AAP पंजाब को बचाने की तैयारी में है.
✔ भगवंत मान की जगह केजरीवाल खुद मुख्यमंत्री बन सकते हैं, ऐसी अटकलें तेज हैं.
✔ पंजाब की लुधियाना विधानसभा सीट खाली है, जिससे केजरीवाल के वहां से चुनाव लड़ने की संभावना बढ़ गई है.
✔ आज की बैठक से पार्टी की भविष्य की रणनीति तय हो सकती है.
अब सवाल यही है कि केजरीवाल क्या पंजाब में नई पारी खेलेंगे या यह सिर्फ राजनीतिक कयासबाजी है? इसका जवाब जल्द ही सामने आ सकता है. First Updated : Tuesday, 11 February 2025