पश्चिम बंगाल : कोलकाता स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले में प्रमुख आरोपी प्रत्युष कुमार सुरेका को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत की गई है. मामले की जांच 2016 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें 25 बैंकों से 2,672 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था. जांच में यह सामने आया कि ज्वेलरी कारोबार के लिए लिए गए बैंक लोन को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया था.
सोलर प्रोजेक्ट में बैंक लोन का गबन
आपको बता दें कि साल 2011–12 के दौरान लिए गए बैंक लोन को M/s Alex Astral Power Pvt. Ltd. और इससे जुड़ी कंपनियों के माध्यम से सोलर पावर प्रोजेक्ट में लगाया गया. इस परियोजना की कुल लागत करीब 400 करोड़ रुपये थी, जिसमें 120 करोड़ की इक्विटी और 280 करोड़ का बैंक फाइनेंस शामिल था. जांच में यह भी पता चला कि इस राशि का ट्रांसफर फर्जी तरीके से कम कीमत पर किया गया और बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया गया. ED के अनुसार यह ट्रांजैक्शन संबंधित पार्टी डील के रूप में किया गया, जिससे संपत्ति की वास्तविक वैल्यू छिपाई गई और अपराध की आय का इस्तेमाल किया गया.
फर्जी दस्तावेज और डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग
जांच में यह सामने आया कि प्रत्युष सुरेका ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किए, डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया और डमी डायरेक्टर्स नियुक्त किए. इसके अलावा, उन्होंने अपने नियंत्रण वाली कंपनियों के फंड्स को झूठे लोन और सर्कुलर ट्रांजैक्शन के माध्यम से ट्रांसफर कर काले धन को सफेद दिखाने की कोशिश की. प्रत्यक्ष और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से यह साफ हुआ कि फर्जी बिक्री दिखाने के बावजूद वास्तविक नकद प्रवाह का इस्तेमाल किया गया.
थाईलैंड भागने के प्रयास में था सुरेका
ED के मुताबिक, प्रत्युष सुरेका ने कई बार जांच में सहयोग नहीं किया और विदेश भागने का प्रयास किया. 5 जनवरी 2026 को उन्हें कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने से रोका गया. सबूतों में छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका के कारण ED ने उनकी गिरफ्तारी की. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम की धारा 3 के तहत आता है, क्योंकि फर्जी ट्रांजैक्शन, सर्कुलर फंड मूवमेंट और डमी कंपनियों के माध्यम से अपराध की आय लगातार ठिकाने लगाई जा रही थी. इस गिरफ्तारी के बाद यह मामला भारतीय वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में सामने आया है.
First Updated : Saturday, 17 January 2026