महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता और हाल ही में निर्वाचित कॉर्पोरेटर यशवंत किल्लेदार ने मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन के निर्माण का विरोध करते हुए इसे रोकने का ऐलान किया है. बिहार सरकार मुंबई में कैंसर मरीजों के लिए 240 बिस्तरों की सुविधा वाले छात्रावास और लगभग 30 मंजिला इमारत के निर्माण की योजना बना रही है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 314 करोड़ रुपये बताई जा रही है. एमएनएस ने इस परियोजना को लेकर एक बार फिर उत्तर भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर अपना सख्त रुख दोहराया है.
यशवंत किल्लेदार ने कहा कि महाराष्ट्र इस समय कई गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से गुजर रहा है. राज्य में किसान संकट, शिक्षा की बढ़ती लागत, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पहले से ही जनता पर भारी पड़ रहे हैं. ऐसे हालात में किसी दूसरे राज्य की सरकार द्वारा मुंबई में इतनी बड़ी रकम खर्च करना उन्हें अनुचित लगता है.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार खुद विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहा है, तो वहां की सरकार को यह धन अपने ही राज्य में निवेश करना चाहिए. किल्लेदार का कहना है कि यदि बिहार सरकार वास्तव में कैंसर रोगियों की मदद करना चाहती है, तो उसे बिहार में ही बेहतर अस्पताल, मेडिकल सुविधाएं और स्वास्थ्य ढांचा विकसित करना चाहिए, न कि मुंबई में बड़ी इमारतें खड़ी करनी चाहिए.
एमएनएस नेता ने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई में बिहार भवन के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना सक्रिय है, तब तक इस परियोजना की शुरुआत भी नहीं होने दी जाएगी. किल्लेदार ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जमीन और संसाधनों का उपयोग पहले राज्य के नागरिकों की जरूरतों के लिए होना चाहिए.
राज ठाकरे के नेतृत्व वाली एमएनएस लंबे समय से स्थानीय मुद्दों और ‘मराठी मानुष’ के अधिकारों को लेकर मुखर रही है. पार्टी का मानना है कि महाराष्ट्र में बाहर से आने वाली परियोजनाओं और आबादी का दबाव स्थानीय लोगों के हितों को प्रभावित करता है. इसी सोच के तहत एमएनएस ने इस प्रस्तावित बिहार भवन को गैरजरूरी बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है.
फिलहाल, बिहार सरकार की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, इस मुद्दे ने मुंबई की राजनीति में एक बार फिर क्षेत्रीय पहचान और संसाधनों के उपयोग को लेकर बहस को तेज कर दिया है. अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस टकराव को किस दिशा में ले जाते हैं. First Updated : Wednesday, 21 January 2026