कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा सीट दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि लंबे समय से पार्टी में बने हालात की वजह से यह फैसला लिया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह किसी दूसरी पार्टी में जाएंगे, तो रॉय ने कहा कि उन्होंने राजनीति में 59 साल बिता दिए हैं। ऐसे में वह सोच-समझकर और आत्ममंथन के बाद ही अगला कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि राज्यसभा के उनके और साथी भी इस्तीफा देंगे या नहीं।
रॉय का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक के लिए दिल्ली में हैं। आज सुबह दोनों नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचे थे। उसी दिन बंगाल से यह खबर आई कि पार्टी के अंदर असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।
विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार और बीजेपी की सरकार बनने के बाद पार्टी में उथल-पुथल तेज हो गई है। कई विधायक ममता बनर्जी द्वारा विपक्ष के नेता चुने गए सोवनदेब चट्टोपाध्याय को मानने से इनकार कर रहे हैं। बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि विधायक उन्हें ही नेता मानते हैं। हालांकि बागियों ने यह भी साफ किया है कि ममता बनर्जी उनके लिए मार्गदर्शक बनी रहेंगी।
बंगाल में इस बगावत के बाद अटकलें तेज हैं कि तृणमूल के संसदीय दल में भी दरार पड़ सकती है। इससे पहले वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भ्रष्टाचार का हवाला देकर पार्टी के पदों से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के बाद लोगों का भरोसा टूटा है, जिसका असर चुनाव में दिखा।
सुखेंदु शेखर रॉय खुद भी आरजी कर घटना के विरोध में हुए प्रदर्शनों में शामिल हुए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि महिलाओं के खिलाफ जुल्म अब बहुत हो चुका है और इसका विरोध करना जरूरी है।
इधर तृणमूल के लगभग 20 लोकसभा सांसद दिल्ली में एक अनजान जगह पर बैठक कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक वे दो विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। पहला विकल्प यह है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की जाए कि उन्हें अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अलग माना जाए।
दूसरा विकल्प सामूहिक इस्तीफा देना है। पार्टी के अंदर मची इस उथल-पुथल ने साफ कर दिया है कि बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के लिए अंदरूनी चुनौती सबसे बड़ी बन गई है। First Updated : Monday, 08 June 2026