पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: रिकॉर्डतोड़ मतदान ने बढ़ाया सस्पेंस, TMC या BJP किसे मिलेगा फायदा?
West Bengal में पहले चरण के चुनाव में रिकॉर्डतोड़ मतदान ने सियासी हलचल तेज कर दी है. 90% से ज्यादा वोटिंग ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यह लहर Mamata Banerjee के पक्ष में जाएगी या Bharatiya Janata Party के लिए गेमचेंजर साबित होगी.

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: West Bengal विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है. इस बार मतदान प्रतिशत ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे चुनावी विश्लेषकों और राजनीतिक दलों के बीच नई बहस छिड़ गई है.
पहले चरण में 152 सीटों पर 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो अंतिम आंकड़ों में 93 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. यह आंकड़ा 2021 के चुनाव के पहले चरण के 83.2 प्रतिशत मतदान से करीब 10 प्रतिशत अधिक है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह भारी मतदान Mamata Banerjee की All India Trinamool Congress के पक्ष में जाएगा या Bharatiya Janata Party के लिए अवसर बनेगा.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने किया मतदाताओं को सलाम
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदान संपन्न होने के बाद मतदाताओं के उत्साह की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह आजादी के बाद सबसे ऊंचे मतदान प्रतिशत में से एक है.
वोटिंग पैटर्न क्या कहता है?
पिछले 45 विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के मुताबिक, जहां मतदान प्रतिशत कम रहा या स्थिर रहा, वहां अधिकतर मौजूदा सरकार को फायदा मिला.
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में कम या समान मतदान के बावजूद सत्ताधारी दल ने वापसी की.
हालांकि, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों में यह ट्रेंड उलट भी गया.
विशेषज्ञों के अनुसार, जब मतदान 7 प्रतिशत या उससे ज्यादा बढ़ता है, तो इसका मतलब होता है कि जनता या तो सरकार को मजबूत समर्थन देना चाहती है या पूरी तरह बदलाव चाहती है.
16 जिलों में बंपर वोटिंग, कई जगह 90% के पार
पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें 12 जिलों में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई.
दक्षिण दिनाजपुर में सबसे अधिक 94.4 प्रतिशत मतदान हुआ, जहां हिंदू वोटर्स की संख्या निर्णायक मानी जाती है.
इसके अलावा कूचबिहार (94%), बीरभूम (93.2%), जलपाईगुड़ी (92.7%) और मुर्शिदाबाद (92.7%) में भी भारी मतदान हुआ.
मुर्शिदाबाद में बदलते समीकरण
मुर्शिदाबाद, जहां मुस्लिम आबादी 65 प्रतिशत से अधिक है, अब सियासी नजरों का केंद्र बन गया है.
यहां अब तक All India Trinamool Congress का दबदबा रहा है, लेकिन हुमायूं कबीर की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
क्या TMC के लिए चुनौती बनेंगे हुमायूं कबीर?
हुमायूं कबीर अपनी अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं और अगर वह मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो कम से कम 13 सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं.
इस स्थिति में Bharatiya Janata Party को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है.
हाई वोटिंग वाली सीटों का गणित
मुर्शिदाबाद की भगवानगोला सीट पर 96.5%, रघुनाथगंज में 96.3% और लालगोला में 96% मतदान हुआ.
इन सीटों पर मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है, जबकि हिंदू आबादी अल्पसंख्यक है. फरक्का (95.7%) और जंगीपुर (94.8%) में भी यही ट्रेंड देखने को मिला.
वहीं, हिंदू बहुल सीटों पर भी बंपर वोटिंग हुई, लेकिन मुस्लिम बहुल सीटों के मुकाबले औसतन 2% कम रही.
क्या भयमुक्त मतदान से बदलेगा खेल?
इस बार चुनाव में 2.4 लाख केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, जिससे मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा.
पिछले चुनावों में जहां हिंसा और डर का माहौल था, इस बार स्थिति काफी अलग नजर आई.
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बड़ी संख्या में लोगों ने बिना डर के मतदान किया?
और अगर ऐसा हुआ, तो क्या इसका फायदा Bharatiya Janata Party को मिलेगा, जो लंबे समय से भयमुक्त चुनाव की मांग कर रही थी.
'साइलेंट वोटर' बना चर्चा का केंद्र
राजनीतिक गलियारों में ‘साइलेंट वोटर’ सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब लोग बिना दबाव के वोट डालते हैं, तो सत्ता विरोधी लहर ज्यादा मजबूत होती है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ट्रेंड बदलाव की ओर इशारा कर रहा है या फिर मौजूदा सरकार को मजबूत समर्थन मिल रहा है.
आंकड़ों में छिपा जीत-हार का गणित
2021 के चुनाव में Bharatiya Janata Party को 77 सीटें मिली थीं, जबकि All India Trinamool Congress ने 215 सीटों पर जीत हासिल की थी.
पहले चरण की 152 सीटों में पिछली बार बीजेपी ने 59 और TMC ने 92 सीटें जीती थीं. अगर इस बार बीजेपी इन आंकड़ों को उलट देती है, तो वह 170 सीटों तक पहुंच सकती है, लेकिन इसके लिए उसे पहले और दूसरे चरण में शानदार प्रदर्शन करना होगा.


