सरकारी खातों में 590 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा, IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में आई बड़ी गिरावट

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा से जुड़े सरकारी खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध गड़बड़ी का खुलासा किया है. खबर के बाद शेयरों में तेज गिरावट आई और बैंक ने जांच शुरू कर चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया.

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नई दिल्ली: सोमवार सुबह शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा. निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई. बैंक ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का खुलासा किया, जिसके बाद बाजार में घबराहट फैल गई और शेयर लोअर सर्किट तक पहुंच गया. सुबह करीब 10:20 बजे बैंक का शेयर करीब 16 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 69 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था. शुरुआती गिरावट लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो निवेशकों की चिंता को साफ दिखाती है.

मामला कैसे सामने आया?

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक से अपना खाता बंद करने और उसमें जमा राशि को दूसरी जगह ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. प्रक्रिया के दौरान बैंक ने पाया कि विभाग द्वारा बताई गई रकम और बैंक के सिस्टम में दर्ज शेष राशि में अंतर है.

इसके बाद 18 फरवरी से अगले कुछ दिनों में हरियाणा सरकार की अन्य संस्थाओं ने भी इसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत की. प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह समस्या चंडीगढ़ शाखा में संचालित सरकारी खातों के एक विशेष समूह तक सीमित है. बैंक ने स्पष्ट किया कि अन्य ग्राहकों के खातों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है.

बैंक ने उठाए सख्त कदम?

बैंक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही यह भी संकेत दिया है कि मामले में अन्य व्यक्ति या बाहरी संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं. बैंक के अनुसार फिलहाल सुलह के दायरे में लगभग 590 करोड़ रुपये की राशि है. हालांकि अंतिम नुकसान का आंकड़ा इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी राशि वसूल होती है, दावों की पुष्टि कैसे होती है और कानूनी प्रक्रिया का क्या नतीजा निकलता है. इस मामले की निगरानी के लिए बोर्ड की एक विशेष समिति बनाई गई. 

20 फरवरी को समिति की बैठक हुई, जिसके बाद लेखा परीक्षा समिति और निदेशक मंडल ने भी बैठक कर स्थिति की समीक्षा की. बैंक ने एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी को फोरेंसिक ऑडिट सौंपा है और अपने वैधानिक ऑडिटरों को भी सूचित कर दिया है. इसके अलावा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और अन्य बैंकों से संदिग्ध लाभार्थी खातों पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है. बैंक ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी.

हरियाणा सरकार ने दिए निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने अपने विभागों को जांच पूरी होने तक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ बैंकिंग लेनदेन अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले से शेयर पर दबाव और बढ़ गया है.

विश्लेषकों का मानना है कि 590 करोड़ रुपये की राशि बैंक की पूंजी स्थिति के लिए बड़ा खतरा नहीं है. हालांकि, संभावित प्रावधानों के कारण निकट भविष्य में बैंक की मुनाफे पर असर पड़ सकता है. निवेशकों की नजर अब फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट और बैंक की धनराशि वसूलने की क्षमता पर टिकी है. जांच के नतीजे और जवाबदेही तय होने के बाद ही बाजार में विश्वास बहाल हो पाएगा. First Updated : Monday, 23 February 2026