फरवरी का महीना सरकार के लिए महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत देकर गया है. खुदरा महंगाई फरवरी में सात महीने के निचले स्तर पर गिरकर 3.61 प्रतिशत पर आ गई. इसका मुख्य कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी आना है. इससे आरबीआई के लिए अगले महीने ब्याज दरों में दूसरी बार कटौती की गुंजाइश बन गई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी में 4.31 प्रतिशत और दिसंबर में 5.22 प्रतिशत थी. पिछले साल अगस्त में महंगाई 3.65 प्रतिशत थी.
एनएसओ द्वारा जारी आंकड़ो के अुसार, जनवरी 2025 की तुलना में फरवरी 2025 में खाद्य महंगाई में 222 आधार अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई है. फरवरी 2025 में खाद्य महंगाई मई 2023 के बाद सबसे कम है. एनएसओ ने कहा कि फरवरी के दौरान मुख्य महंगाई और खाद्य महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, दालों और उत्पादों तथा दूध और उत्पादों की महंगाई में गिरावट के कारण हुई है.
आरबीआई ने महंगाई के मोर्चे पर चिंता कम करने के लिए पिछले महीने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी. केंद्रीय बैंक अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा 9 अप्रैल को करेगा.
इससे पहले कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई जनवरी में थोड़ी कम होकर क्रमशः 4.61 प्रतिशत और 4.73 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2024 में 5.01 प्रतिशत और 5.05 प्रतिशत थी.
श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कृषि मजदूरों (सीपीआई-एएल) और ग्रामीण मजदूरों (सीपीआई-आरएल) के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जनवरी 2025 के महीने के लिए क्रमशः 4 अंक और 3 अंक घटकर 1,316 और 1,328 अंक पर पहुंच गया. बयान के अनुसार, दिसंबर 2024 में सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल क्रमशः 1,320 अंक और 1,331 अंक पर रहे.
जनवरी, 2025 के महीने के लिए सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल पर आधारित साल-दर-साल मुद्रास्फीति दर क्रमशः 4.61 प्रतिशत और 4.73 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जनवरी, 2024 में यह 7.52 प्रतिशत और 7.37 प्रतिशत थी. दिसंबर, 2024 के लिए इसी आंकड़े सीपीआई-एएल के लिए 5.01 प्रतिशत और सीपीआई-आरएल के लिए 5.05 प्रतिशत थे.
First Updated : Thursday, 13 March 2025