Real Estate: 1 फरवरी को बजट 2025 पेश किए जाने के बाद घर खरीदने की चाह रखने वालों के लिए नया सवाल खड़ा हो गया है... क्या किराए पर रहना सही रहेगा या अपार्टमेंट खरीदना ज्यादा बेहतर होगा? नई कर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा, जिससे संभावित घर खरीदारों के लिए डिस्पोजेबल इनकम बढ़ गई है. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि अब घर खरीदना बेहतर फैसला होगा?
विशेषज्ञों की मानें तो ₹12 लाख सालाना कमाने वाले व्यक्ति को अपनी वित्तीय स्थिति का अच्छी तरह से आकलन करना चाहिए, क्योंकि घर खरीदने का निर्णय केवल कर बचत तक सीमित नहीं है. इसके लिए डाउन पेमेंट, ईएमआई भुगतान की क्षमता और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. आइए समझते हैं कि किराए पर रहने और घर खरीदने के बीच कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
बजट 2025 के तहत संशोधित कर स्लैब से डिस्पोजेबल इनकम में बढ़ोतरी होगी, जिससे संभावित खरीदारों के पास अधिक धनराशि बचेगी. कर विशेषज्ञों के अनुसार, ₹12 लाख वार्षिक कमाने वाले व्यक्ति को सालाना ₹80,000 की कर बचत होगी, जिसे घर खरीदने के लिए अलग रखा जा सकता है. नई कर नीति के कारण एक अकेला उधारकर्ता ₹6-7 लाख अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने में सक्षम हो सकता है. वहीं, यदि एक दंपति संयुक्त रूप से लोन लेते हैं, तो उनका होम लोन बजट ₹12-14 लाख तक बढ़ सकता है.
घर खरीदने का निर्णय लेने से पहले होम लोन की ईएमआई और मौजूदा किराए का तुलनात्मक विश्लेषण करना आवश्यक है. विशेषज्ञों की राय है कि मासिक आय का 30% से अधिक हिस्सा आवास व्यय में नहीं जाना चाहिए. यदि किराया और संभावित ईएमआई के बीच अधिक अंतर है, तो किराए पर रहना ही उचित रहेगा. अगर आप एक युवा, अविवाहित पेशेवर (25-35 वर्ष) हैं, तो आप अपनी आय का 40-45% तक ईएमआई के लिए आवंटित कर सकते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब आपके पास पर्याप्त आपातकालीन फंड हो, स्वास्थ्य बीमा हो और अन्य कोई बड़ा कर्ज न हो. वहीं, विवाहित लोगों के लिए यह अनुपात 30% से अधिक नहीं होना चाहिए, क्योंकि उन्हें परिवार की जरूरतों और बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान देना होता है.
घर खरीदने का सबसे बड़ा मुद्दा डाउन पेमेंट होता है. ₹12 लाख सालाना कमाने वाले व्यक्ति की कुल कर बचत ₹80,000 होगी, लेकिन वह ₹45 लाख के अपार्टमेंट के लिए आवश्यक ₹9 लाख का डाउन पेमेंट करने की स्थिति में नहीं होगा. हालांकि, यदि एक दंपति की संयुक्त आय ₹24 लाख सालाना है, तो वे आसानी से डाउन पेमेंट कर सकते हैं. ₹70 लाख के अपार्टमेंट पर 20% डाउन पेमेंट की आवश्यकता होती है, जो कि ₹14 लाख होती है. ऐसे में, दंपति ₹16.6 लाख की कुल बचत के साथ यह भुगतान कर सकते हैं.
विशेषज्ञों की राय में, यदि आप कम से कम 10-12 साल एक ही शहर में रहने की योजना बना रहे हैं, तो घर खरीदना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, यदि आपके पास 6 महीने की आपातकालीन निधि है और आपकी ईएमआई आपकी शुद्ध आय के 40% से अधिक नहीं है, तो आप घर खरीदने पर विचार कर सकते हैं.
यदि किसी संपत्ति की कीमत का 20 गुना वार्षिक किराया नहीं बनता है, तो उसे खरीदने की बजाय किराए पर लेना ज्यादा समझदारी होगी. उदाहरण के लिए, यदि किसी अपार्टमेंट की कीमत ₹1 करोड़ है, लेकिन उसका मासिक किराया सिर्फ ₹20,000 है, तो इसे किराए पर लेना अधिक किफायती विकल्प रहेगा.
यदि आपका करियर अनिश्चित है और आपको 5-7 वर्षों में शहर बदलना पड़ सकता है.
यदि आप मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में हैं, जहां ईएमआई की लागत किराए से कहीं अधिक है.
यदि आप अपनी पूंजी को अधिक लिक्विड रखना चाहते हैं और अन्य निवेश विकल्पों पर ध्यान देना चाहते हैं.
यदि किराए की आय (वार्षिक किराया ÷ घर का मूल्य) 2.5% से कम है, तो घर खरीदना फायदेमंद नहीं होगा.
घर खरीदने का निर्णय केवल कर बचत या ईएमआई की तुलना तक सीमित नहीं होना चाहिए. वित्तीय स्थिरता, डाउन पेमेंट की क्षमता, दीर्घकालिक योजनाएं और किराए की लागत जैसे सभी कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है. अगर आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत है, ईएमआई आय के 30-40% के भीतर है और आप अगले 10 वर्षों तक उसी स्थान पर रहने की योजना बना रहे हैं, तो घर खरीदना एक अच्छा निर्णय हो सकता है. लेकिन यदि आपकी नौकरी अनिश्चित है, बार-बार स्थानांतरण की संभावना है या डाउन पेमेंट का बजट नहीं है, तो किराए पर रहना ज्यादा समझदारी होगी. First Updated : Wednesday, 12 February 2025