असली कंपनी तो लिस्टेड ही नहीं, फिर किस 'पारले' के शेयर छू रहे आसमान? नाम का कन्फ्यूजन पड़ा भारी

PM मोदी द्वारा जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने के बाद शेयर बाजार में अनोखी घटना देखने को मिली. दरअसल, ‘मेलोडी’ टॉफी वाले ट्रेंड के बाद जिस कंपनी के शेयर में तेजी आई है उसका टॉफी से कोई संबंध ही नहीं है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक छोटे से पल ने शेयर बाजार में बड़ा खेल कर दिया. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने के बाद अचानक एक ऐसी कंपनी के शेयरों में तूफानी तेजी आ गई, जिसका इस टॉफी से कोई सीधा संबंध ही नहीं है. नाम की समानता के कारण निवेशकों में भ्रम फैल गया और लोग पारले प्रोडक्ट्स की जगह पारले इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने लगे. नतीजा यह हुआ कि लगातार तीन दिनों से इस कंपनी के शेयर अपर सर्किट पर पहुंच रहे हैं.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इस वीडियो में पीएम मोदी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी का पैकेट गिफ्ट करते नजर आए. सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे दोनों नेताओं के वायरल निकनेम “मेलोडी” से जोड़कर मजाकिया अंदाज में शेयर करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर छा गया और लाखों लोगों ने इसे देखा. यहीं से शेयर बाजार में भी हलचल शुरू हो गई. कई रिटेल निवेशकों ने यह समझ लिया कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले इंडस्ट्रीज है और उन्होंने तेजी से इसके शेयर खरीदने शुरू कर दिए.

असली कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं

दिलचस्प बात यह है कि ‘मेलोडी’ टॉफी बनाने वाली असली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में सूचीबद्ध ही नहीं है. लेकिन नाम की समानता की वजह से निवेशकों में भ्रम पैदा हो गया. लोगों ने पारले इंडस्ट्रीज को ही पारले प्रोडक्ट्स समझ लिया और खरीदारी शुरू कर दी. इसी वजह से कंपनी के शेयरों में अचानक जोरदार उछाल देखने को मिला. हालांकि अब यह साफ हो चुका है कि पारले इंडस्ट्रीज का मेलोडी टॉफी से कोई संबंध नहीं है, लेकिन इसके बावजूद शेयरों में खरीदारी जारी है.

तीन दिनों में निवेशकों ने कमाए करोड़ों

शुक्रवार को पारले इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 4.90 प्रतिशत चढ़कर 5.78 रुपये तक पहुंच गया. कंपनी का मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 28.23 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. अगर तीन दिन पहले की बात करें तो कंपनी का मार्केट कैप 25 करोड़ रुपये से भी कम था. यानी सिर्फ तीन दिनों में कंपनी के बाजार मूल्य में करीब 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई. इस तेजी से उन निवेशकों को बड़ा फायदा हुआ जिन्होंने शुरुआती दौर में इस शेयर में पैसा लगाया था.

क्यों बढ़ते हैं ऐसे शेयर?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कम कीमत और छोटे मार्केट कैप वाले शेयरों में इस तरह की तेजी अक्सर देखने को मिलती है. जब किसी खबर या वायरल घटना की वजह से अचानक रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ जाती है, तो ऐसे शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है. कई बार लोग पूरी जानकारी के बिना सिर्फ नाम या ट्रेंड देखकर निवेश कर देते हैं. पारले इंडस्ट्रीज के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद निवेशकों ने बिना कंपनी की पूरी जानकारी समझे खरीदारी शुरू कर दी.

लंबी अवधि में अभी भी कमजोर प्रदर्शन

हालांकि हालिया तेजी ने शेयर को चर्चा में ला दिया है, लेकिन लंबी अवधि के आंकड़े अब भी कमजोर तस्वीर दिखाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में इस शेयर में 40 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं छह महीनों में यह करीब 46 प्रतिशत टूटा, जबकि एक साल में इसमें 68 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई. यानी हाल की तेजी के बावजूद यह शेयर अभी भी अपने पुराने स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है.

निवेशकों के लिए सबक

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ट्रेंड या वायरल घटनाओं के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है. किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसकी वास्तविक स्थिति, कारोबार और वित्तीय जानकारी को समझना बेहद जरूरी होता है. पारले इंडस्ट्रीज का मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि कभी-कभी सिर्फ नाम की समानता भी शेयर बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर सकती है.

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