NEET पेपर लीक मामला: सीकर बना CBI जांच का केंद्र, नासिक से केरल तक फैला नेटवर्क

जांच एजेंसियों को शक है कि NEET-UG का पेपर सीधे नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ। सूत्रों के मुताबिक प्रेस से जुड़े एक शख्स ने पेपर को एक चेन नेटवर्क में डाल दिया। वहां से यह गुरुग्राम में बैठे एक डॉक्टर तक पहुंचा।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया। इस फैसले से 22 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया और दिल्ली समेत कई शहरों में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए।

अब इस मामले की CBI जांच का सबसे बड़ा केंद्र सीकर बन गया है, जिसे राजस्थान का नया कोटा कहा जा रहा है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की जांच में नासिक से सीकर और फिर पूरे देश तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

नासिक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ लीक का खेल 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच एजेंसियों को शक है कि NEET-UG का पेपर सीधे नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ। सूत्रों के मुताबिक प्रेस से जुड़े एक शख्स ने पेपर को एक चेन नेटवर्क में डाल दिया। वहां से यह गुरुग्राम में बैठे एक डॉक्टर तक पहुंचा। इसके बाद जयपुर के जमवा रामगढ़ के रहने वाले खटीक नाम के व्यक्ति ने डॉक्टर से पेपर खरीद लिया। CBI ने प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है।

सीकर का काउंसलर बना कड़ी 

जमवा रामगढ़ से पेपर सीकर के राकेश कुमार मंडावरिया तक पहुंचा। राकेश बड़े कोचिंग संस्थानों के बाहर MBBS काउंसलिंग एजेंट का काम करता है। यहीं से पेपर वन-टू-वन नेटवर्क के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड के कोचिंग सेंटरों तक फैल गया। जांच में सामने आया कि पेपर को "गेस पेपर" बताकर बांटा गया। असल में ये ट्यूटर्स द्वारा पिछले सालों के ट्रेंड पर बनाए गए प्रैक्टिस पेपर होते हैं।

30 हजार से 28 लाख तक में बिका पेपर 

यह पेपर परीक्षा से करीब 15 दिन पहले से ही घूम रहा था। मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को इसे 30 हजार से 28 लाख रुपये तक में बेचा गया। नागौर का एक छात्र तो 3 मई 2026 की परीक्षा से चार दिन पहले सीकर आया और पेपर के लिए 28 लाख रुपये दे दिए। पूछताछ में उसने बताया कि उसे दिल्ली से कॉल आया था कि "पेपर आ गया है"।

लालच में खुल गया नेटवर्क का राज 

पेपर माफिया का नेटवर्क बेहद गुप्त तरीके से काम करता है, लेकिन इस बार पैसे के लालच में पोल खुल गई। राकेश ने 30 हजार में पेपर अपने साथी को बेचा जो केरल में MBBS कर रहा सीकर का छात्र था। एग्जाम से एक दिन पहले उस छात्र ने पेपर अपने पिता को भेज दिया। उसके पिता सीकर में PG चलाते हैं।

"पापा, ये कल के एग्जाम में आएगा" 

छात्र ने मैसेज में लिखा, “पापा, सीकर के एक दोस्त ने भेजा है। इसे अपने हॉस्टल की लड़कियों को दे दो। कल के एग्जाम में यही आएगा।” PG संचालक ने बिना सोचे पेपर लड़कियों में बांट दिया। 3 मई को एग्जाम के बाद उसने एक कोचिंग टीचर से चेक कराया कि कितने सवाल मैच हुए।

बायोलॉजी-केमिस्ट्री के सभी सवाल हूबहू मिले 

चौंकाने वाली बात यह थी कि NEET में पूछे गए बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल उस 281 सवालों वाले "गेस पेपर" में थे। NEET में कुल 180 सवाल होते हैं। जांच में पता चला कि केमिस्ट्री के 45 सवाल उसी क्रम में थे जैसे असल पेपर में थे। यहां तक कि कॉमा और फुल स्टॉप भी नहीं बदले थे।

NTA से IB तक पहुंची शिकायत 

सच पता चलने पर PG संचालक सीकर के उद्योग नगर थाने गया, लेकिन पुलिस ने अफवाह कहकर टाल दिया। इसके बाद उसने NTA को जानकारी दी। NTA ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को बताया और IB ने राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया। SOG ने जांच शुरू कर PG संचालक समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया। देहरादून और झुंझुनू में भी छापे मारे गए। MBBS काउंसलर राकेश भी हिरासत में है।

सीकर बना पेपर माफिया का नया अड्डा 

जांच अब सीकर और जयपुर पर केंद्रित है। कोटा में एडमिशन घटने से छात्र सीकर जा रहे हैं, जिससे यह बड़ा कोचिंग हब बन गया है। एजेंसियों को शक है कि सीकर पेपर लीक नेटवर्क का नया केंद्र बन रहा है। भले ही पेपर पहले जयपुर में लीक हुआ, लेकिन सबसे ज्यादा फैला सीकर में। अब एजेंसियां इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

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