करोड़ों की फीस, बोल्ड सीन का ऑफर… फिर भी एक्टर रजनीश दुग्गल ने कहा ‘ना’, एक फैसले ने बदल दिया पूरा करियर

रजनीश ने अपने एक्टिंग करियर और अपनी निजी जिंदगी में जिन पर्सनल नियमों का वह पालन करते हैं, उनके बारे में बात की. एक्टर ने बताया कि वह स्क्रीन पर इंटिमेट या किसिंग सीन क्यों नहीं करते.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: आजकल एक्टर-मॉडल रजनीश दुग्गल अपनी वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश 2 के प्रमोशन में बिजी हैं. रणदीप हुड्डा और रजनीश दुग्गल स्टारर यह सीरीज 15 मई को ओटोटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुई थी. सीरीज की रिलीज से पहले रजनीश ने अपने एक्टिंग करियर और अपनी निजी जिंदगी में जिन पर्सनल नियमों का वह पालन करते हैं, उनके बारे में बात की. एक्टर ने बताया कि वह स्क्रीन पर इंटिमेट या किसिंग सीन करने में सहज महसूस नहीं करते हैं.

इंटिमेट सीन से मिलते हैं करोड़ों

एक्टर ने कहा कि उन्हें स्क्रीन पर इंटिमेट या किसिंग सीन करने में सहजता महसूस नहीं होती है. नतीजतन, उन्होंने करोड़ों रुपये के मौके गंवा दिए हैं. गलाटा इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा, अपने करियर की शुरुआत में मैंने कई प्रोजेक्ट्स को 'ना' कह दिया था क्योंकि मैंने किसिंग सीन करने से मना कर दिया था. वह कहते हैं जिन फिल्मों में मैंने किसिंग सीन करने से मना किया था, वे आगे चलकर जबरदस्त हिट हुई. मुझे इस बात का कोई पछतावा नहीं है क्योंकि मेरी अपनी पत्नी के साथ एक खास तरह का रिश्ता है.

रजनीश ने क्या कहा

रजनीश जोर देकर कहते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी के सम्मान में किसिंग सीन करने से मना कर दिया था, उन्हें इस फैसले पर बिल्कुल भी पछतावा नहीं है. वह आगे कहते हैं, आज भी मैं उन फिल्मों में रोल स्वीकार नहीं करता जिनमें किसिंग या इंटिमेट सीन की जरूरत होती है. रजनीश ने आगे समझाया अगर मैंने किसिंग सीन करने के लिए हां कह दिया होता तो पल्लवी, जो उस समय मेरी गर्लफ्रेंड थी और अब मेरी पत्नी है. आज मेरे साथ नहीं होती. वह मुझे उसी समय छोड़कर चली गई होती.

कहानी

इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा की कहानी 1990 के दशक पर आधारित है और सच्ची घटनाओं से प्रेरित है. यह बात हम सभी को अच्छी तरह पता है. इसे कुछ हद तक एक नया अंदाज देने की कोशिश जरूर की जा सकती थी. या अगर पूरी तरह से नया नहीं तो कम से कम थोड़ा अलग तरीका तो अपनाया ही जा सकता था. आखिर, फिल्ममेकर्स अक्सर 'सिनेमैटिक आजादी' ले लेते हैं. यहां तक कि एक मरे हुए इंसान को भी जिंदा कर देते हैं. फिर भी इस खास सीरीज में, वे कहानी में कोई जान डालने में नाकाम रहे. आपको यह सीरीज तभी पसंद आएगी जब आपको पुलिस नेताओं और गैंगस्टरों के बीच टकराव वाली पुरानी फिल्में पसंद हों.

यह सीरीज  कैसी है?

यह सीरीज आपको पुराने जमाने की उन क्लासिक गैंगस्टर फिल्मों वाला ही एहसास देती है. इसमें कुछ भी बुरा नहीं है लेकिन इसमें कुछ भी नया भी नहीं है. यह फॉर्मूला-बेस्ड और घिसी-पिटी लगती है. ऐसा लगता है जैसे हमने यह सब पहले भी हज़ार बार देखा है. फर्क बस इतना है कि उन फिल्मों में किरदार काल्पनिक होते थे जबकि यहां हमें इंस्पेक्टर अविनाश की सच्ची कहानी दिखाई गई है.

चाहे पुलिस स्टेशन के सीन हों या पुलिस और नेताओं के बीच टकराव, इसमें डायलॉग बोलने का वही पुराना अंदाज है जो हमने बार-बार देखा है. इंस्पेक्टर अविनाश और उनके बेटे से जुड़ा सब-प्लॉट थोड़ा-बहुत इमोशनल जुड़ाव पैदा कर पाता है, लेकिन, इंस्पेक्टर अविनाश के नेताओं और माफिया से भिड़ने वाले सीन कोई असली रोमांच पैदा नहीं कर पाते.

सभी कलाकार काबिल हैं लेकिन कमजोर राइटिंग और ट्रीटमेंट की वजह से वे इस कहानी को बेहतर बनाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाए. यह सच है कि कहानी 1990 के दशक की है लेकिन उस दौर की कई और कहानियों को इस कहानी से कहीं ज्यादा असरदार तरीके से फिल्मों या सीरीज में ढाला गया है.

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