14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ (CRPF) का एक काफिला गुजर रहा था, जब एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी कार को एक बस से टकरा दिया. इस भीषण हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई. पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली.
पुलवामा हमले के ठीक 12 दिन बाद, भारत ने इस हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले किए. 25 फरवरी की रात, भारतीय वायुसेना ने गुप्त अभियान के तहत जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर 1,000 किलोग्राम बम गिराए, जिसमें लगभग 300 आतंकवादियों के मारे जाने की जानकारी दी गई. ये 1971 के युद्ध के बाद पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार करके पाकिस्तान के अंदर 65 किलोमीटर तक घुसकर जैश के ट्रेनिंग कैंप को नष्ट कर दिया.
बालाकोट एयर स्ट्राइक के अगले दिन भारतीय और पाकिस्तानी वायुसेना के बीच हवाई संघर्ष हुआ. इस दौरान भारतीय वायुसेना के मिग-21 बाइसन ने पाकिस्तान के F-16 विमान को मार गिराया, लेकिन मिग-21 भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया और विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान पाकिस्तानी सेना की गिरफ्त में आ गए.
गिरफ्तारी के बावजूद विंग कमांडर अभिनंदन ने अदम्य साहस और धैर्य का परिचय दिया. अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान को 1 मार्च 2019 को अभिनंदन को भारत को सौंपना पड़ा. उनकी वीरता को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें वीर चक्र से नवाजा.
6 साल बाद भी पुलवामा हमला देश के लिए एक गहरी याद बनकर मौजूद है, जो हमें उन वीर जवानों के बलिदान की याद दिलाता है. वहीं, बालाकोट एयर स्ट्राइक ने ये स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवादी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा. First Updated : Friday, 14 February 2025