पश्चिम बंगाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को लेकर शुरू हुआ विवाद शनिवार को और गहरा गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्था और राज्य सरकार की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार की आलोचना करते हुए इस घटनाक्रम को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” करार दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले सभी लोग इस घटना से आहत हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देशवासियों को भी दुखी कर दिया है.
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी की है और राष्ट्रपति के अपमान के लिए राज्य का प्रशासन जिम्मेदार है. दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि पहले कार्यक्रम का स्थल विधाननगर तय किया गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर गोसाईंपुर क्यों कर दिया गया. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि नए स्थल पर लोगों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी.
राष्ट्रपति ने यह भी हैरानी जताई कि उनके स्वागत के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद था. उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम स्थल तक आसानी से पहुंच गईं, जबकि राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया था कि वहां बहुत अधिक भीड़ हो सकती है. राष्ट्रपति ने भावुक अंदाज में कहा कि शायद आयोजकों को लगा होगा कि वह खाली जगह पर कार्यक्रम करके वापस चली जाएंगी.
अपने संबोधन में उन्होंने ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं और दोनों ही बंगाल की बेटियां हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि मुख्यमंत्री उनसे किसी बात पर नाराज हैं या नहीं, लेकिन उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से दुख जरूर हुआ है.
राष्ट्रपति की टिप्पणियों के बाद ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति का बयान राजनीतिक स्वरूप का है. उन्होंने अपील की कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप न हों. उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले भाजपा शासित राज्यों की स्थिति पर भी नजर डालनी चाहिए.
इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस ने भी राष्ट्रपति तक “गलत जानकारी” पहुंचने का दावा किया और राज्य सरकार की आदिवासी कल्याण योजनाओं का हवाला दिया. वहीं भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया और इसे संवैधानिक परंपराओं की अनदेखी बताया. First Updated : Saturday, 07 March 2026