गृहमंत्री ने साफ किया कि सीट बढ़ाने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। इसके पीछे पूरा गणित है। अगर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण देना है, तो सीटें बढ़ानी पड़ेंगी। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया। अगर 100 सीट हैं, तो 33 सीट महिलाओं के लिए चाहिए। ऐसे में सामान्य सीटें कम न हों, इसके लिए कुल सीटें बढ़ानी जरूरी हैं।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सीधे महिला आरक्षण से जुड़ा है। 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है। इसके लिए सीटों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी होगी। तभी संतुलन बना रहेगा। सरकार इसे बड़ा सुधार मान रही है। विपक्ष इसे सियासी चाल बता रहा है।
विपक्ष का बड़ा आरोप यही है। कहा जा रहा था कि परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होगा। लेकिन अमित शाह ने इसे खारिज किया। उन्होंने आंकड़े पेश किए। बताया कि दक्षिण की सीटें 129 से बढ़कर 195 होंगी। प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा। यानी नुकसान की बात सही नहीं है।
सीट बढ़ने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। नए क्षेत्रों में नई सीटें बनेंगी। इससे कई राज्यों की ताकत बढ़ेगी। कुछ राज्यों का प्रभाव कम भी हो सकता है। राजनीतिक पार्टियों की रणनीति बदलनी पड़ेगी। यह बदलाव बड़ा माना जा रहा है।
सरकार परिसीमन आयोग के जरिए यह प्रक्रिया करेगी। यह आयोग सीटों का नया बंटवारा तय करेगा। जनसंख्या के आधार पर सीटें तय होंगी। यह प्रक्रिया आसान नहीं होती। इसमें समय लगता है। लेकिन सरकार का कहना है कि यह पूरी पारदर्शिता से होगा।
सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव तुरंत लागू नहीं होगा। 2029 के लोकसभा चुनाव में इसे लागू करने की योजना है। तब तक पुराने सिस्टम से ही चुनाव होंगे। इससे राज्यों को तैयारी का समय मिलेगा। यह बात भी गृहमंत्री ने स्पष्ट की।
यह फैसला सिर्फ सीट बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे देश की राजनीति का संतुलन बदल सकता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। नए चेहरे सामने आएंगे। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है। विपक्ष सवाल उठा रहा है। लेकिन यह तय है कि यह मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रहेगा। First Updated : Thursday, 16 April 2026