पटना : बिहार की सियासत में गुरुवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है. प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका था जब तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने एक साथ राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की विशेष मौजूदगी रही. जिसने इस पूरे घटनाक्रम को न केवल राजनीतिक रूप से वजनदार बनाया. बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की एकजुटता का एक बड़ा संदेश भी दिया है.
राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए नामांकन करने वाले नेताओं में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. इन तीनों कद्दावर नेताओं ने एक साथ विधानसभा पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना पर्चा भरा. राजनीतिक गलियारों में एक ही समय पर तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का नामांकन करना एक अनोखा रिकॉर्ड माना जा रहा है. जो राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है.
अमित शाह की मौजूदगी में हुआ यह नामांकन कार्यक्रम केवल एक प्रक्रिया मात्र नहीं थी. बल्कि विरोधियों के लिए एनडीए की ताकत का एक बड़ा प्रदर्शन भी था. विश्लेषकों का मानना है कि तीन मुख्य दलों के अध्यक्षों का एक साथ चुनाव मैदान में उतरना आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत रणनीति का हिस्सा है. यह कदम यह भी दर्शाता है कि बिहार में एनडीए के बीच समन्वय अब पहले से कहीं अधिक गहरा और मजबूत हो चुका है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करना उनके लंबे राजनीतिक करियर का एक नया मोड़ माना जा रहा है. करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद. अब उनका दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होना कई बड़े बदलावों की आहट दे रहा है. उनके साथ भाजपा और रालोमो के अध्यक्षों का जुड़ना इस बात का संकेत है कि बिहार की भविष्य की राजनीति में इन तीनों ही दलों की भूमिका निर्णायक होने वाली है.
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी नजरें आगामी तिथियों पर टिकी हैं. चुनाव आयोग के अनुसार. दाखिल किए गए सभी नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच छह मार्च को की जाएगी. यदि कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहता है. तो उसके लिए नौ मार्च तक का समय निर्धारित किया गया है. यदि आवश्यकता पड़ी. तो 16 मार्च को सुबह नौ बजे से मतदान होगा और उसी शाम नतीजों की घोषणा भी कर दी जाएगी.
बिहार से निकलने वाला यह राजनीतिक संदेश पूरे देश की सियासत को प्रभावित करने की क्षमता रखता है. तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का उच्च सदन के लिए नामांकन करना यह सुनिश्चित करता है कि संसद में बिहार और एनडीए की आवाज और अधिक प्रखर होगी. इस घटनाक्रम की गूँज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है. क्योंकि यह न केवल क्षेत्रीय संतुलन को साधता है. बल्कि केंद्र और राज्य के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में भी कार्य करेगा. First Updated : Thursday, 05 March 2026