बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी सोमवार 30 मार्च को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने जा रहे हैं. यह फैसला लंबे समय से चर्चा में था और अब जेडीयू के वरिष्ठ नेता ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है. जेडीयू नेता एवं बिहार विधायक अनंत कुमार सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता उनके इस कदम के विरोध में थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना मन पहले ही बना लिया था और अब कोई बदलाव संभव नहीं है.
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका केवल औपचारिक रह सकती है और उनकी पार्टी जेडीयू का क्षेत्रीय प्रभाव भी काफी घट सकता है.
आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की कोई इच्छा नहीं थी. उन्हें जेडीयू के मुख्य सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के दबाव में यह फैसला लेना पड़ा.
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी जेडीयू को खत्म करने की कोशिश कर रही है.
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार 9 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, नितीश कुमार भले ही जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हों, लेकिन अब पार्टी उनके हाथ में नहीं है, बल्कि इसे एक ऐसा गुट चला रहा है जो बीजेपी के साथ मिला हुआ है. उन्होंने आगे बताया, हम हमेशा कहते आए हैं कि बीजेपी जेडीयू को खत्म करना चाहती है. इसी योजना के तहत नितीश कुमार को राज्यसभा भेजा गया है. वे मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे.
नीतीश कुमार ने इस साल 5 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले की घोषणा की थी. साथ ही उन्होंने बिहार विधानसभा के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा भी व्यक्त की थी.
राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए के अन्य उम्मीदवार भी मौजूद थे. First Updated : Monday, 30 March 2026