तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज, दोषी साबित हुए तो 10 साल तक की सजा!

बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा को लेकर जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या की कोशिश समेत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

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पटना: बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा को लेकर जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या की कोशिश समेत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और फिलहाल वह बेऊर केंद्रीय कारागार में हैं।  

गांधी मैदान में हिंसा, कई पुलिसकर्मी घायल   

पटना पुलिस के मुताबिक यह मामला बिहार बंद के दौरान हुई झड़प से जुड़ा है। NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में बिहार बंद बुलाया गया था। बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान के आसपास जुटे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक हो गई। पथराव हुआ और पुलिस से झड़प हुई।

इसमें गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा, TOP प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसी मामले में गांधी मैदान थाना कांड संख्या 400/26 दर्ज किया गया है, जिसमें तेज प्रताप यादव को नामजद किया गया है। पुलिस ने शनिवार शाम पटना के एक शॉपिंग मॉल से तेज प्रताप को गिरफ्तार किया। अगले दिन उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत का आदेश हुआ।  

BNS की धारा 109 सबसे गंभीर   

एफआईआर में BNS की कई धाराएं लगाई गई हैं। सबसे गंभीर आरोप धारा 109 का है, जो हत्या की कोशिश से जुड़ी है। पुलिस का कहना है कि हिंसा के दौरान किए गए कृत्य से किसी की जान जा सकती थी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह आरोप साबित होता है तो 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर पीड़ित को गंभीर चोट साबित हुई तो सजा उम्रकैद तक बढ़ सकती है।

इसके अलावा उन पर धारा 132 - लोक सेवक पर हमला, धारा 251 - दंगा, धारा 191(3) - हथियार के साथ दंगा, धारा 196 - समूहों में वैमनस्य फैलाना, धारा 223 - वैध आदेश की अवहेलना, धारा 61(2) - आपराधिक साजिश, धारा 299 - धार्मिक भावना आहत करना और धारा 293 जैसी धाराएं भी लगी हैं। साथ ही Prevention of Damage to Public Property Act 1984 की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई हैं, जो सरकारी संपत्ति को नुकसान से संबंधित हैं।  

वकील ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल  

तेज प्रताप के वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। वकील ने बताया कि जल्द ही जमानत याचिका दायर की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि हिंसा से जुड़े सभी वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य सबूत खंगाले जा रहे हैं। आरोप सिद्ध होंगे या नहीं, इसका फैसला अदालत में सबूतों के आधार पर होगा। बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद कई नेताओं के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, लेकिन तेज प्रताप पर हत्या की कोशिश की धारा लगना इस मामले को सबसे गंभीर बनाता है।   First Updated : Sunday, 26 July 2026