बारिश में जन्नत बन जाता है छत्तीसगढ़ का ये हिल स्टेशन, मानसून ट्रिप के लिए आज ही बनाएं प्लान
आप किसी ऐसी शांत जगह की तलाश में हैं जहां प्रकृति अपनी पूरी भव्यता के साथ बिखरी हो, तो छत्तीसगढ़ का मैनपाट आपका अगला ठिकाना हो सकता है. जब भी हम किसी हिल स्टेशन की योजना बनाते हैं, तो हिमाचल या उत्तराखंड का रुख करते हैं.

रायपुर: भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, अगर आप किसी ऐसी शांत जगह की तलाश में हैं जहां प्रकृति अपनी पूरी भव्यता के साथ बिखरी हो, तो छत्तीसगढ़ का मैनपाट आपका अगला ठिकाना हो सकता है. जब भी हम किसी हिल स्टेशन की योजना बनाते हैं, तो हिमाचल या उत्तराखंड का रुख करते हैं. लेकिन अब पर्यटकों का रुझान बदल रहा है. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में समुद्र तल से करीब 1,000 मीटर की ऊंचाई पर बसा मैनपाट तेजी से देश के नक्शे पर एक पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है.
मैनपाट को 'मिनी शिमला' क्यों कहा जाता है?
इसका सबसे बड़ा कारण यहां का मौसम है. ऊंचे पहाड़ों पर बसे होने के कारण यहाँ सालभर मौसम सुहावना रहता है. गर्मियों में जहां मैदानी इलाके तपते हैं, वहीं मैनपाट की ठंडी हवाएं सैलानियों को राहत देती हैं. घने जंगलों, चारों तरफ फैली मखमली हरियाली और शानदार घाटियों की वजह से स्थानीय लोग और पर्यटक इसे बड़े प्यार से 'छत्तीसगढ़ का मिनी शिमला' कहते हैं.
मानसून में मैनपाट की जादुई रंगत
बरसात के दिनों में यहां का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं होता. मानसून दस्तक देते ही पूरी घाटी सफेद कोहरे और धुंध की चादर में लिपट जाती है. पहाड़ों से नीचे गिरते दूधिया झरने और कल-कल बहती नदियां इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं. बारिश के बाद हरी-भरी वादियों के बीच से गुजरना एक अलग ही रोमांच पैदा करता है.
'छोटा तिब्बत
मैनपाट सिर्फ अपनी प्राकृतिक बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है. इसे 'छोटा तिब्बत' भी कहा जाता है, क्योंकि यह तिब्बती शरणार्थियों का एक प्रमुख निवास स्थल है. यहां की तिब्बती बस्तियां, उनकी जीवनशैली और यहां का खूबसूरत बौद्ध मंदिर पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक अनुभव से रूबरू कराते हैं.
कौतूहल जगाते हैं यहां के अनोखे स्थल
मैनपाट में प्राकृतिक नजारों के अलावा कुछ ऐसी जगहें हैं जो विज्ञान को चुनौती देती नजर आती हैं और पर्यटकों को हैरत में डाल देती हैं. उल्टा पानी, एक ऐसी जगह जहां पानी ढलान की ओर बहने के बजाय ऊपर की तरफ यानी चढ़ाई की ओर बहता है. जलजली की जमीन पर पैर पटकने या कूदने से धरती किसी गद्दे की तरह हिलने लगती है.


