छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज! रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में बनी 5 सदस्यीय समिति
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है.

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी. यह समिति UCC का मसौदा तैयार करेगी और इसे लागू करने के लिए सरकार को आवश्यक सुझाव देगी.
समिति किन विषयों पर करेगी काम?
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार समिति राज्य में मौजूदा कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी. इसके साथ ही विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य संबंधित विषयों पर सुझाव तैयार करेगी. समिति इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद UCC का प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी.
#WATCH | Raipur: On Uniform Civil Code, Chhattisgarh CM Vishnu Deo Sai says, "... The UCC will definitely be implemented in Chhattisgarh, and a committee has already been formed under retired judge (Justice (Retd.) Ranjana Prakash Desai). She will meet people across all sections… pic.twitter.com/49Rs3lLooj
— ANI (@ANI) June 26, 2026
समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
रंजना प्रकाश देसाई के अलावा समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा पूर्व प्राचार्य ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है. यह समिति कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अपनी सिफारिशें सरकार को देगी.
जनता और विशेषज्ञों से भी मांगे जाएंगे सुझाव
सरकार ने कहा है कि समिति आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव भी लेगी. इसके अलावा उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया जाएगा, जहां UCC को लेकर पहले से काम हुआ है. इन सभी सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
कैबिनेट ने पहले ही दी थी मंजूरी
इस साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का फैसला लिया था. सरकार का कहना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण कानूनी प्रक्रियाएं जटिल हो जाती हैं.
ऐसे में समान नागरिक संहिता कानूनों को सरल बनाने और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में मददगार हो सकती है.
विपक्ष ने जताई आपत्ति
इस फैसले पर विपक्षी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि UCC लागू होने से आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. अब समिति के गठन के साथ राज्य में UCC का प्रारूप तैयार करने, सुझाव लेने और कानूनी अध्ययन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है.


