नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की आंधी में महागठबंधन टिक नहीं पाया. सबसे बुरी हालत तो देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की रही. पार्टी ने 61 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 6 ही सीटों पर जीत नसीब हुई. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा, जिसके बाद पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर बाहर आने लगा है. कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हार की वजहों पर खुलकर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि पार्टी संगठन कमजोर है, टिकट सही तरीके से नहीं दिए गए, बूथ स्तर पर नेटवर्क बहुत कमजोर था और शीर्ष नेतृत्व से दूरी बने रहना.
पटना में कांग्रेस नेता कृपानाथ पाठक ने बताया कि जमीनी हालात की सही जानकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंचाई गई. उनके मुताबिक, इस वजह से इतनी बड़ी गलती हुई. उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर अब भी नेतृत्व जागा नहीं, तो भविष्य में पार्टी को और बड़ा संकट झेलना पड़ सकता है.
केरल से सांसद शशि थरूर ने भी हार पर निराशा जताई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सिर्फ आत्ममंथन ही नहीं, बल्कि रणनीति और संगठन की वैज्ञानिक तरीके से समीक्षा करनी चाहिए. थरूर ने यह भी कहा कि उन्हें बिहार में प्रचार के लिए बुलाया ही नहीं गया, इसलिए उन्हें वहां की स्थिति को सीधे देखने का मौका नहीं मिला.
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद पार्टी ने मुझे उस लायक नहीं समझा. वहीं, वरिष्ठ नेता निखिल कुमार ने साफ कहा कि हार का सबसे बड़ा कारण संगठन की कमजोरी है. उनका कहना है कि मजबूत संगठन चुनाव जिता सकता है. उम्मीदवारों का चयन ठीक था, लेकिन चुनाव रणनीति और प्रबंधन कमजोर रहा.
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने नीतीश कुमार और NDA को जीत की बधाई दी और कहा कि पार्टी को अपनी हार की गंभीर समीक्षा करनी होगी. उन्होंने यह भी माना कि RJD और कांग्रेस के बीच की 'फ्रेंडली फाइट' ने नुकसान पहुंचाया. कांग्रेस नेता मुमताज़ पटेल ने नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब न बहाने चलेंगे और न दोषारोपण. उनके अनुसार, पार्टी इसलिए बार-बार चुनाव हार रही है, क्योंकि सत्ता कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गई है, जो जमीनी वास्तविकताओं से पूरी तरह अनजान हैं.
हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने टिकट वितरण में गड़बड़ी की ओर इशारा किया और कहा कि अगर इसमें कोई अनियमितता हुई है, तो कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने AIMIM के कांग्रेस से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाने को हैरान करने वाला बताया. खासकर, इसलिए क्योंकि सीमांचल की कई सीटें पहले कांग्रेस के पास हुआ करती थीं. कुल मिलाकर बिहार चुनाव परिणाम ने कांग्रेस के अंदर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है. पार्टी के भीतर अब खुली आलोचना बढ़ रही है और नेतृत्व पर सीधे सवाल उठने लगे हैं. यह नतीजा कांग्रेस के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत माना जा रहा है. First Updated : Saturday, 15 November 2025