200 CCTV, 150 फोन ट्रैक और 3 महीने की तलाश के बाद पकड़ी गई दिल्ली की 1 लाख इनामी ड्रग क्वीन

दिल्ली की कुख्यात 'ड्रग क्वीन' ने पूरे दो महीने तक पुलिस को चकमा दिया. 200 सीसीटीवी, 100 फोन ट्रैक और बार-बार छापों के बावजूद वह हर बार बच निकलती थी. आखिरकार 9 अप्रैल को उसका यह लुका-छिपी का खेल खत्म हुआ और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

दिल्ली पुलिस ने दो महीने की लगातार तलाश के बाद राजधानी की कुख्यात 'ड्रग क्वीन' कुसुम को गिरफ्तार कर लिया है. 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और 100 से अधिक मोबाइल फोन रिकॉर्ड्स के विश्लेषण के बाद शाहदरा में आखिरकार उसका जाल बिछाया गया. 9 अप्रैल को शाहदरा में पुलिस की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. कुसुम पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था और वह एमसीओसीए के तहत फरार थी. लंबे समय से पुलिस की नजर में चल रही यह महिला अब संगठित ड्रग सिंडिकेट की सरगना के रूप में सामने आई है.

200 CCTV, 100 फोन और 2 महीने की तलाश

कुसुम की तलाश दो महीने पहले शुरू हुई थी जब शाहदरा पुलिस को उसके ठिकाने की कुछ जानकारी मिली. पुलिस ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया. 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और 100 से अधिक मोबाइल फोन के रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया. कई बार पुलिस की टीमें उसके बेहद करीब पहुंचीं, लेकिन हर बार वह चकमा देकर निकल जाती थी. वह बिना स्मार्टफोन के, लगातार जगह बदलती और नए सिम कार्ड के साथ नया ठिकाना चुनती थी.

शाहदरा में आखिरी जाल और गिरफ्तारी

गुरुवार को पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली कि कुसुम शाहदरा आने वाली है. इस बार पुलिस पहले से तैयार थी. पूरे इलाके को सील कर दिया गया और एक सघन जाल बिछाया गया. कुसुम ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस का शिकंजा पहले ही कस चुका था. कुछ ही देर में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

कहां और कैसे चल रहा था ये ड्रग सिंडिकेट

पूछताछ में सामने आया कि कुसुम अकेली नहीं थी. वह दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले एक बड़े संगठित ड्रग नेटवर्क की कथित सरगना थी. उसकी बेटियां दीपा और चीकू भी इस सिंडिकेट का हिस्सा हैं और दोनों को पहले ही एमसीओसीए के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है. उसके भाई हरिओम और साथी रवि भी नेटवर्क में सक्रिय थे. पुलिस के अनुसार पूरा परिवार इस ड्रग कारोबार को चलाने में शामिल था.

फेरीवाली से ड्रग क्वीन तक का सफर

कुसुम का सफर दिल्ली के सुल्तानपुरी से शुरू हुआ. शुरू में वह छोटे स्तर पर ड्रग्स बेचने का काम करती थी. धीरे-धीरे उसने अपना खुद का नेटवर्क खड़ा कर लिया, जो दिल्ली से निकलकर आस-पास के राज्यों तक फैल गया. वर्षों तक वह पुलिस की नजरों से बचती रही और अपना दायरा लगातार बढ़ाती गई.

सालों से फरार, केसों का अंबार

रोहिणी कोर्ट द्वारा घोषित अपराधी कुसुम पर 2003 से 2024 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत कम से कम 11 मामले दर्ज हैं. पुलिस का कहना है कि कुसुम की गिरफ्तारी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय संगठित ड्रग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई है.

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