DRDO ने गृह मंत्रालय को दिया AI सिस्टम 'प्रज्ञा' सैटेलाइट, भारत की आंतरिक सुरक्षा होगी और मजबूत

भारत की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए DRDO ने अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को AI से लैस आधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट सिस्टम ‘प्रज्ञा’ सौंप दिया है. जानिए इस सिस्टम की खासियत क्या है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है. DRDO ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को AI से लैस आधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट सिस्टम ‘प्रज्ञा’ सौंप दिया है.

सोमवार को कर्तव्य भवन-3 में हुए कार्यक्रम में DRDO सचिव समीर वी कामत ने गृह सचिव को यह सिस्टम सौंपा. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर बना है और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक बनाने का मकसद रखता है.

प्रज्ञा सिस्टम की खासियत

‘प्रज्ञा’ को DRDO की प्रयोगशाला सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CIAR) ने पूरी तरह भारत में विकसित किया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है. इससे गृह मंत्रालय को वास्तविक समय में सटीक जानकारी मिलेगी और तुरंत फैसले लेने में आसानी होगी. 

यह सिस्टम देश के संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए बनाया गया है. अब सुरक्षा बलों को आतंकवादियों और नक्सलियों की गतिविधियों पर सख्त नजर रखने में मदद मिलेगी.

आतंकवाद और नक्सलवाद पर सख्ती बढ़ेगी

‘प्रज्ञा’ सिस्टम की मदद से गृह मंत्रालय की सुरक्षा एजेंसियां तेजी से काम कर सकेंगी. तत्काल निर्णय लेने, संवेदनशील इलाकों की निरंतर निगरानी और आतंकवादी-नक्सली ऑपरेशनों में यह सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा.

DRDO के अधिकारी मानते हैं कि इससे भारत की आंतरिक सुरक्षा की दीवार और मजबूत हो जाएगी. पूरी प्रक्रिया स्वदेशी होने से विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता भी कम होगी.

नौसेना को भी मिली नई ताकत

DRDO ने नौसेना के लिए भी एक बड़ी सफलता हासिल की है. गोवा के तट पर स्वदेशी एयर-ड्रॉपेबल कंटेनर ‘ADC-150’ के चार सफल ट्रायल किए गए. 21 फरवरी से 1 मार्च तक नौसेना के P-8I विमान से यह कंटेनर हवा से गिराया गया. सभी परीक्षण सफल रहे. यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक सामान ले जा सकता है. इसमें दवाइयां, खाना-पीने की चीजें या स्पेयर पार्ट्स रखे जा सकते हैं. 

गहरे समुद्र में तैनात जहाजों तक जरूरी सामान पहुंचाना अब आसान हो जाएगा. आगरा, बेंगलुरु, हैदराबाद और विशाखापत्तनम की प्रयोगशालाओं ने मिलकर इसे बनाया है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक नौसेना के मिशनों को और प्रभावी बनाएगी.

आत्मनिर्भर भारत की नई मिसाल

DRDO के इन दोनों कदमों से साफ है कि भारत अब अपनी सुरक्षा को स्वदेशी तकनीक से मजबूत कर रहा है. ‘प्रज्ञा’ सिस्टम आंतरिक सुरक्षा के लिए और ‘ADC-150’ समुद्री अभियानों के लिए नई राह खोल रहे हैं. आने वाले दिनों में इनका पूरा फायदा सुरक्षा बलों को मिलेगा.

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