मतदाता सूची को अपडेट रखने के लिए चुनाव आयोग समय-समय पर विशेष गहन पुनरीक्षण करता है। इसे एसआईआर कहा जाता है। इसका उद्देश्य फर्जी या दोहराए गए नाम हटाना है। साथ ही नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना भी इसमें शामिल होता है। इस प्रक्रिया से चुनावी पारदर्शिता बढ़ती है। आयोग चाहता है कि हर वोटर का सही रिकॉर्ड तैयार हो। इसलिए राज्यों को तैयारी तेज करने को कहा गया है।
चुनाव आयोग ने 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश भेजे हैं। इनमें दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड भी शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल, महाराष्ट्र, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्य भी सूची में हैं। आयोग ने कहा कि अप्रैल 2026 से प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इसलिए सभी मुख्य चुनाव अधिकारियों को तैयारी पूरी करनी होगी। इसका लक्ष्य व्यापक और सटीक मतदाता सूची तैयार करना है।
बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, असम समेत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर जारी है। कुछ जगह यह प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है। आयोग ने अक्टूबर 2025 में इसकी घोषणा की थी। इसके तहत पूर्व-संशोधन गतिविधियां भी शुरू की गईं। अब शेष राज्यों में भी इसे लागू किया जाएगा। आयोग इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।
चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि सभी तैयारियां जल्द पूरी की जाएं। बूथ स्तर पर डेटा सत्यापन पर जोर दिया गया है। मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी। आयोग चाहता है कि किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे। इसलिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर विशेष योजना बनाई जा रही है।
एसआईआर प्रक्रिया पहले भी राजनीतिक विवाद का कारण बन चुकी है। बिहार और पश्चिम बंगाल में इस पर घमासान हुआ था। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे। हालांकि आयोग ने आरोपों को खारिज किया। कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर हुई हैं। फिलहाल यह मामला विचाराधीन है। इससे एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस तेज बनी हुई है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने एसआईआर के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे अवांछित नाम हटाने में मदद मिलेगी। भाजपा ने सहयोग के लिए कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की है। इसमें वकीलों को भी शामिल किया गया है। पार्टी ने कहा कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही सभी मतदाताओं को सहयोग देने की बात कही गई है।
एसआईआर शुरू होने से मतदाताओं को दस्तावेज सत्यापन करना होगा। नए वोटरों को नाम जुड़वाने का मौका मिलेगा। वहीं गलत या दोहराए गए नाम हट सकते हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया मजबूत होगी। आयोग का मानना है कि सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। First Updated : Thursday, 19 February 2026