नई दिल्ली : देशभर के कई राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं की पहचान करना है. हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं. कुछ मतदाताओं का कहना है कि फॉर्म भरने के बावजूद उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए दफ्तर में बुलाया गया.
ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने अनुभव साझा किया
आपको बता दें कि पूर्व नौसेना प्रमुख रिटायर्ड ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया पर इस प्रक्रिया की आलोचना की. उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने फॉर्म भर दिया था, लेकिन उन्हें अलग-अलग तारीखों और अलग-अलग स्थानों पर पेश होकर पहचान साबित करने के लिए नोटिस मिला. उनकी उम्र 82 वर्ष और पत्नी की 78 वर्ष है, और इसके बावजूद उन्हें 18 किलोमीटर की दूरी तय करके दफ्तर में उपस्थित होना पड़ा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष सुविधा नहीं चाहते, केवल फॉर्म भरने के आधार पर ही नाम मतदाता सूची में होना चाहिए.
अन्य रिटायर्ड अधिकारियों के साथ समान स्थिति
ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने यह भी कहा कि दक्षिण गोवा से सांसद और रिटायर्ड नौसेना अधिकारी विरियातो फर्नांडीज को भी इसी तरह का नोटिस मिला था. उन्होंने बताया कि उनके नाम मतदाता सूची में लंबे समय से दर्ज थे, और चुनाव से पहले आयोग द्वारा पूरी जांच भी की गई थी.
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को साफ-सुथरा करना और डुप्लीकेट एवं मृत मतदाताओं की पहचान करना है. इस प्रक्रिया के तहत बिहार में पहले कार्यवाही की गई थी और अब 12 अन्य राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है, जिनमें अधिकांश राज्यों में आगामी चुनाव हैं. इस स्थिति ने यह स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया भले ही औपचारिक रूप से सभी के लिए समान हो, लेकिन बुजुर्ग और रिटायर्ड अधिकारियों के लिए इसमें समय और प्रयास की कठिनाई बनी रहती है.
First Updated : Sunday, 11 January 2026