डिब्रूगढ़: असम के डिब्रूगढ़ से भारत की रणनीतिक ताकत का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पूर्वोत्तर के पहले इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) का निरीक्षण करेंगे, जहां लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों का भव्य हवाई प्रदर्शन होगा. चीन और म्यांमार सीमा के नजदीक स्थित यह ढांचा सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.
यह दौरा केवल एक उद्घाटन कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे और रक्षा तैयारियों को नई दिशा देने वाला कदम है. डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर तैयार यह सुविधा राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और त्वरित सैन्य तैनाती के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकती है.
पीएम मोदी सुबह करीब 10:30 बजे मोरान बाईपास पर बने ईएलएफ पर उतरेंगे. यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा इमरजेंसी लैंडिंग केंद्र है, जिसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से विकसित किया गया है.
यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में सक्षम है. प्राकृतिक आपदा या रणनीतिक जरूरतों के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
यह इमरजेंसी रनवे 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले ट्रांसपोर्ट विमानों को संभाल सकता है. 4.2 किलोमीटर लंबी यह एयरस्ट्रिप राष्ट्रीय आपात स्थितियों और मानवीय अभियानों के समय वैकल्पिक रनवे के रूप में काम करेगी.
शनिवार को पूर्वोत्तर में नेशनल हाईवे पर पहली बार विमान लैंडिंग स्ट्रिप का औपचारिक संचालन होने जा रहा है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक कदम है.
एक अधिकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नई दिल्ली से उड़ान भरकर असम के चाबुआ एयरफोर्स बेस पहुंचेंगे और वहां से मोरान ईएलएफ पर उतरेंगे. इसके बाद वे लगभग 16 भारतीय वायुसेना (IAF) विमानों के एयरशो का अवलोकन करेंगे.
बुधवार से ही एयरस्ट्रिप पर ट्रायल रन जारी हैं. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ देखने के लिए एकत्र हो रहे हैं.
मोरान से चीन की सीमा लगभग 300 किलोमीटर और म्यांमार की सीमा करीब 200 किलोमीटर दूर है. एक अधिकारी ने कहा, "ईएलएफ रणनीतिक रूप से अहम जगह पर स्थित है."
यह भौगोलिक स्थिति इस एयरस्ट्रिप को रक्षा तैयारियों के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण बनाती है. जरूरत पड़ने पर यह सैन्य गतिविधियों के लिए तेज और प्रभावी विकल्प प्रदान करेगी.
मोरान के रंजन गोगोई ने कहा, "फोरलेन वाले हाईवे के निर्माण से आवाजाही आसान हो जाएगी. लड़ाकू विमानों को उतरते देख हमें गर्व हो रहा है."
यह एयरस्ट्रिप देश के अन्य एक्सप्रेसवे मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां परिवहन और लड़ाकू दोनों प्रकार के विमान उतर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने Purvanchal Expressway पर निर्मित हवाई पट्टी का उद्घाटन किया था, जो इसी अवधारणा पर आधारित थी. First Updated : Saturday, 14 February 2026