राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर राज्यसभा का सदस्य नामित कर दिया गया है. उनका पिछला कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ था, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें दोबारा नामांकित करने का फैसला लिया है. यह फैसला उनके लंबे संसदीय अनुभव, संतुलित कार्यशैली और सदन को सुचारू रूप से चलाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. हरिवंश नारायण सिंह को राजनीति में पत्रकारिता से आए एक शांत और संतुलित नेता के रूप में जाना जाता है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा सदस्य के रूप में दोबारा नामित किया है. उनका कार्यकाल हाल ही में खत्म हुआ था. इस फैसले से उन पर लगी अटकलों पर विराम लग गया है कि उन्हें आगे मौका मिलेगा या नहीं.
राज्यसभा के उपसभापति का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्यक्ति सदन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सभापति की गैरमौजूदगी में सदन की कार्यवाही मैनेज करता है. हरिवंश नारायण सिंह का दोबारा नामित होना राजनीतिक रूप से भी अहम संकेत देता है.
हरिवंश नारायण सिंह पिछले कई सालों से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने 2014 में बिहार से राज्यसभा सदस्य के रूप में प्रवेश किया और साल 2018 में पहली बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे. इसके बाद 2020 में उन्हें दोबारा इस पद पर चुना गया.
हरिवंश नारायण सिंह की शुरुआत पत्रकारिता से हुई. उन्होंने मीडिया से करियर की शुरुआत की. 1981 से 1984 तक उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया में भी काम किया, लेकिन पत्रकारिता से दूर नहीं रह सके. साल 1984 में वे बिहार के प्रसिद्ध अखबार ‘प्रभात खबर’ से जुड़ गए. यहीं से उनकी नजदीकियां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बढ़ीं. बाद में नीतीश कुमार ने उन्हें जनता दल का महासचिव बनाया.
हरिवंश नारायण सिंह को एक शांत और संतुलित नेता के रूप में जाना जाता है. उन्होंने राज्यसभा में कई बार कठिन हालातों में भी सदन को सुचारू रूप से चलाने की कोशिश की है. विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका की सराहना की जाती रही है. First Updated : Friday, 10 April 2026