उत्तर प्रदेश में हिंदुत्ववादी संगठन ने बंगाल के मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद के खिलाफ विरोध मार्च का आह्वान किया है. विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने लखनऊ में बैनर लगाकर लोगों से अपील की है कि वे 10 फरवरी को मुर्शिदाबाद पहुंचें और निर्माण कार्य को रोकें. जिसकी शुरुआत 11 फरवरी से होने वाली है.
यह विवाद पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ जब निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखी. उनका उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ हासिल करना बताया जा रहा है, साथ ही अयोध्या में मस्जिद निर्माण में देरी पर असंतोष जताना.
पिछले साल 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद की स्मृति को जीवित रखने के लिए एक नई मस्जिद की नींव रखी. यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार हुमायूं कबीर को मस्जिद निर्माण के लिए दानकर्ताओं से 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल चुकी है. निर्माण कार्य 11 फरवरी से शुरू होने की उम्मीद है.
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने लखनऊ भर में बैनर लगाए हैं, जिनमें नारे लिखा कि 'हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर गिराएंगे. और इस बार मुर्शिदाबाद में नई बाबरी पे आरपार होगा. एक अन्य बैनर पर 'चलो मुर्शिदाबाद (मार्च टू मुर्शिदाबाद) लिखा है, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और परिषद के प्रमुख गोपाल राय की तस्वीरें हैं.
हुमायूं कबीर ने 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद अयोध्या में मस्जिद निर्माण में देरी पर असंतोष जताया था. इस फैसले ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था, जहां 1992 में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था.
उत्तर प्रदेश सरकार ने अंततः सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को धन्नीपुर में पांच एकड़ जमीन आवंटित की, जो बाबरी मस्जिद के स्थान से लगभग 20 किमी दूर है. हालांकि, वहां अब तक कोई निर्माण नहीं हुआ है.
हम किसी को भी भारत में बाबरी मस्जिद के नाम पर कोई भी ढांचा बनाने की इजाजत नहीं दे सकते, क्योंकि बाबरी मस्जिद अब इतिहास बन चुकी है. हम 10 फरवरी को अपने सभी संसाधनों के साथ मुर्शिदाबाद की ओर मार्च करेंगे और 11 फरवरी को वहां इकट्ठा होकर बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बने इस स्मारक के निर्माण को रोकेंगे.
लखनऊ में एक पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा कि उन्हें बैनरों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है. हम समूह के खिलाफ तभी कार्रवाई कर सकते हैं जब कोई आपत्ति उठाए या सरकार चाहे कि हम बैनर हटा दें.
उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा.
First Updated : Tuesday, 10 February 2026