RSS-BJP relationship: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया कि संघ और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विचार समान हो सकते हैं, लेकिन दोनों संगठनों के कार्य और संचालन पूरी तरह स्वतंत्र हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरएसएस, भाजपा अध्यक्ष या उनकी कार्यशैली तय नहीं करता.
जब भागवत से पूछा गया कि क्या भाजपा के अध्यक्ष का चुनाव और पार्टी की दिशा तय करने में आरएसएस की कोई भूमिका होती है, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के जवाब दिया कि यह पूरी तरह गलत धारणा है. ऐसा नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि आरएसएस शाखा संचालन में विशेषज्ञ है, जबकि भाजपा शासन और राजनीति के क्षेत्र में अनुभवी है. इसलिए दोनों संगठन एक-दूसरे की विशेषज्ञता का सम्मान करते हैं.
भागवत ने कहा कि सुझाव दिए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार संबंधित संगठन को ही है. उन्होंने मुस्कराते हुए यह भी कहा किअगर हम निर्णय लेते तो क्या इसमें इतना समय लगता? यह टिप्पणी उन्होंने दर्शकों की तालियों और हंसी के बीच की, जो एक संकेत था कि भाजपा के भीतर निर्णय प्रक्रियाएं आरएसएस द्वारा नियंत्रित नहीं होतीं.
भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल दो साल पहले समाप्त हो चुका है और तब से वे विस्तार पर हैं. पार्टी के अगले अध्यक्ष को लेकर अटकलें जोरों पर हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हालिया मोहन भागवत से मुलाकात भी शामिल है. हालांकि, अब तक इस विषय में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी चर्चा है कि पहली बार भाजपा महिला अध्यक्ष की नियुक्ति कर सकती है. नामों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आंध्र प्रदेश की नेता डी. पुरंदेश्वरी और भाजपा महिला मोर्चा प्रमुख वनाथी श्रीनिवासन शामिल हैं.
आरएसएस और भाजपा के संबंध पर भागवत ने दोहराया कि संघ केवल वैचारिक दिशा देता है और पार्टी के काम में तभी मदद करता है जब कोई अनुरोध करता है. उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता संघ के निर्देश पर पार्टी में मदद करते हैं, लेकिन हम केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं हैं. कोई भी संगठन यदि अच्छे कार्य के लिए मदद चाहता है, तो हम साथ खड़े होते हैं.
First Updated : Thursday, 28 August 2025