पहली बार ऑपरेशनल मोड में परमाणु हथियार, आखिर क्यों बदली भारत की रणनीति?

SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार 12 परमाणु वॉरहेड्स को परिचालन तैनाती में रखा है, जिससे उसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत हुई है. हालांकि भारत अब भी अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर कायम है और परमाणु हथियारों को केवल जवाबी कार्रवाई के लिए ही उपयोग करने की बात कहता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने और रणनीतिक ताकत बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है. इसी क्रम में देश की परमाणु नीति और तैनाती व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को परिचालन तैनाती की श्रेणी में रखा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 12 परमाणु वॉरहेड अब ऐसे प्लेटफॉर्म पर तैनात हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये बदलाव महत्वपूर्ण क्यों? 

SIPRI के मुताबिक, यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक भारत अपने परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले प्लेटफॉर्म को आमतौर पर अलग-अलग रखता था. नई रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत ने पहली बार कुछ परमाणु वॉरहेड को उनके डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़कर परिचालन इकाइयों में तैनात किया है. इससे देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत भूमिगत मिसाइल साइलो और समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. खासतौर पर परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) पर सीमित संख्या में वॉरहेड की तैनाती और उनकी गश्त को भारत की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है.

SIPRI के अनुमान के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार मौजूद थे. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी अधिक बताई गई है. भारत का परमाणु शस्त्रागार वायु सेना, भूमि आधारित मिसाइल प्रणालियों और समुद्री प्लेटफॉर्मों पर आधारित ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ का हिस्सा है. इस त्रिस्तरीय क्षमता का उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ विश्वसनीय प्रतिरोधक शक्ति बनाए रखना है.

भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं

हालांकि, भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. देश अब भी ‘नो फर्स्ट यूज’ सिद्धांत का पालन करता है. इसका अर्थ है कि भारत किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा और परमाणु हथियारों का उपयोग केवल तब करेगा जब उसके खिलाफ परमाणु हमला किया जाए.

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हथियारों की दौड़ में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तैनाती से भारत की रणनीतिक तैयारी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को नई मजबूती मिल सकती है, जबकि उसकी घोषित नीति पहले की तरह रक्षात्मक ही बनी हुई है.

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