आसमान में ही खाक होंगी 5000 किमी वाली मिसाइलें, भारत ने तैयार किया लंबी दूरी का 'ब्रह्मास्त्र', पाकिस्तान के छूटे पसीने

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर पार करते हुए अपनी रणनीतिक सुरक्षा को बेहद मजबूत कर लिया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून, 2026 को मात्र 24 घंटे के भीतर लगातार तीन मिसाइलों का सफल उड़ान परीक्षण किया.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर पार करते हुए अपनी रणनीतिक सुरक्षा को बेहद मजबूत कर लिया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून, 2026 को मात्र 24 घंटे के भीतर लगातार तीन मिसाइलों का सफल उड़ान परीक्षण किया. इस कामयाबी के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों के 'एलीट क्लब' में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) हमलों को नाकाम करने की पूर्ण क्षमता है. इन परीक्षणों में अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) फेज-2 और समंदर में मार करने वाली एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली का सफल प्रदर्शन शामिल रहा.

आसमान में ही ढेर होंगे दुश्मन के मंसूबे

DRDO के इस मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम ने परीक्षण के दौरान अपने लक्ष्यों को हवा में ही सटीकता से इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया. सूत्रों के अनुसार, परीक्षण किए गए दो इंटरसेप्टर मिसाइलें 2,000 से 5,000 किलोमीटर की दूरी से आने वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBM) को रोकने की ताकत रखती हैं. ये मिसाइलें पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर और वायुमंडल के भीतर दोनों स्तरों पर दुश्मनों को खत्म कर सकती हैं.

पड़ोसी देशों की चालबाजियों का पुख्ता तोड़

भारत ने यह स्वदेशी सुरक्षा कवच ऐसे समय में मजबूत किया है जब पड़ोसी देश पाकिस्तान लगातार अपनी मिसाइल क्षमताएं बढ़ा रहा है. पाकिस्तान की 'फतह-I', 'फतह-II' और चीन निर्मित 'P282' मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए भारत का यह नया रक्षा प्राचीर गेम-चेंजर साबित होगा. यह तकनीक दुश्मन की पहले हमले की क्षमता को सीमित कर भारत की सेकंड स्ट्राइक को बेहद विश्वसनीय बनाती है.

नेवल एंटी-शिप मिसाइल का सफल डेब्यू

सुरक्षा कवच को मजबूत करने के साथ ही भारत ने समंदर में भी अपनी आक्रामक धार तेज की है। DRDO ने पहली बार 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज' का पहला मेडेन फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया. यह मध्यम दूरी पर दुश्मन के जंगी जहाजों को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती है, जिससे नौसेना को समुद्री मोर्चे पर बढ़त मिलेगी.

1999 से शुरू हुआ सफर हुआ आत्मनिर्भर

भारत का यह BMD कार्यक्रम 1999 में शुरू हुआ था। फेज-1 को मुख्य रूप से दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया था, जो 2019 में पूरा हो चुका था. अब फेज-2 के तहत भारत ने स्वदेशी रडार विकसित कर लिए हैं, जिनकी ट्रैकिंग रेंज 1,500 किलोमीटर से अधिक है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री पार्टनर्स को इस गौरवपूर्ण स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता पर बधाई दी है.

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