UNHRC में गूंजा PoK का मुद्दा, भारत ने उठाया रोटी-गोली का सवाल, मुनीर सरकार वैश्विक मंच पर बेनकाब

शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की दमनकारी नीतियों के कारण पूरा पीओजेके इस समय विरोध की आग में उबल रहा है. वैश्विक चुप्पी को तोड़ते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को बुरी तरह घेरा है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच से भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हो रहे अमानवीय अत्याचारों को लेकर इस्लामाबाद को दुनिया के सामने बेनकाब किया है. शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की दमनकारी नीतियों के कारण पूरा पीओजेके इस समय विरोध की आग में उबल रहा है. इस गंभीर स्थिति पर वैश्विक चुप्पी को तोड़ते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को बुरी तरह घेरा है. यूएनएचआरसी में भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में दो टूक कहा कि जो आवाम अपने लिए बुनियादी अधिकार, रोटी और बिजली मांग रही है. उसे पाकिस्तानी हुकूमत गोलियों और संगीनों से खामोश कर रही है.

रावलकोट में प्रदर्शनकारियों की हत्या का उठा मुद्दा

भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जिनेवा में जारी सत्र के दौरान विशेष रूप से रावलकोट में भड़की हालिया हिंसा और निर्दोष नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया. भारत ने स्पष्ट किया कि पीओजेके में जारी वर्तमान त्रासदी, मानवाधिकारों का हनन और नागरिकों का दमन पूरी तरह से पाकिस्तान की दशकों पुरानी क्रूर नीतियों का परिणाम है. यह कड़ा रुख भारत ने तब अपनाया जब 14 जून 2026 को रावलकोट के ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक हिंसक ऑपरेशन चलाया था. 

अंधाधुंध गोलियां चली

'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (JKJAAC) के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई, जिसमें कम से कम दो प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. इस दमनकारी ऑपरेशन के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचने के लिए पूरे रावलकोट क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल कम्युनिकेशन सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई.

अपने आंतरिक हालात सुधारे पाकिस्तान

अनुपमा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को पूरी तरह से एक सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया है. स्थानीय नागरिकों की जमीनों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं और सोची-समझी साजिश के तहत वहां जनसांख्यिकीय बदलाव को अंजाम दिया जा रहा है ताकि मूल निवासियों को अल्पसंख्यक बनाया जा सके. नागरिकों को बुनियादी और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं से पूरी तरह वंचित रखा गया है. इसके अलावा, संगठन का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति के बीच खाने-पीने की जरूरी चीजों की सप्लाई रोक दी गई है. जिससे वहां भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं.

पाकिस्तान को कड़ा संदेश

मानवाधिकार परिषद के मंच से भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसे भारत के अभिन्न क्षेत्रों पर झूठे और मनगढ़ंत दावे करने के बजाय अपने आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक संकट को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. भारत ने मांग की कि पाकिस्तान तुरंत PoJK के नागरिकों पर बल प्रयोग बंद करे और उनकी जायज समस्याओं का सम्मानपूर्वक समाधान निकाले. भारत के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की घेराबंदी मजबूत कर दी है. 

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