नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में गाजा में कराए गए शांति समझौते के दूसरे चरण को लागू करने के लिए अब एक नए अंतरराष्ट्रीय ढांचे की तैयारी की जा रही है. इसी क्रम में गाजा पीस बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, इस बोर्ड में भारत को भी शामिल करने के लिए वॉशिंगटन की ओर से नई दिल्ली को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है, हालांकि इस पर अभी भारत या अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
भारत और पाकिस्तान दोनों को मिला निमंत्रण
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए करीब 60 देशों को निमंत्रण भेजा गया है. इनमें भारत के साथ-साथ पाकिस्तान भी शामिल है. पाकिस्तान सरकार ने इस निमंत्रण की पुष्टि कर दी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि इस्लामाबाद को वाशिंगटन की ओर से आमंत्रण प्राप्त हुआ है और पाकिस्तान गाजा से जुड़े शांति प्रयासों में भागीदारी जारी रखेगा.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया अब तक सीमित
अधिकांश देशों ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर चुप्पी साध रखी है. हालांकि, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने खुलकर इसका समर्थन किया है और कहा है कि इटली गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए अपना योगदान देने को तैयार है. वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सैद्धांतिक तौर पर इस पहल का समर्थन जताया है, लेकिन बोर्ड में औपचारिक रूप से शामिल होने को लेकर बातचीत जारी रहने की बात कही है.
क्या है ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड
जानकारी के अनुसार, गाजा पीस प्लान के दूसरे चरण में क्षेत्र के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक निगरानी के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए गाजा पीस बोर्ड का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे. इसके साथ ही गाजा में स्थानीय स्तर पर कामकाज देखने के लिए एक अलग बोर्ड भी गठित करने की योजना है.
स्थायी सदस्यता का प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह उन साझेदार देशों को स्थायी सदस्यता देने का प्रस्ताव है, जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मजबूत प्रतिबद्धता दिखाते हैं. इस बोर्ड के जरिए गाजा में दीर्घकालिक स्थिरता लाने का लक्ष्य रखा गया है.
संयुक्त राष्ट्र से मान्यता और विवाद
गौरतलब है कि गाजा में शांति समझौते के बाद नवंबर 2025 में इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मान्यता मिल चुकी है. हालांकि, उस समय रूस और चीन ने इससे दूरी बनाए रखी थी. दोनों देशों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि गाजा शांति प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं की गई है. शुरुआती तौर पर इस बोर्ड की अवधि 2027 तक तय की गई थी.
यूक्रेन तक बढ़ सकता है दायरा
अब सामने आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप इस पीस बोर्ड के मॉडल को भविष्य में यूक्रेन संकट में शांति स्थापना के लिए भी इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं. इस संभावित विस्तार को लेकर कई यूरोपीय देशों ने चिंता जाहिर की है और इसे लेकर कूटनीतिक स्तर पर चर्चा जारी है.
First Updated : Sunday, 18 January 2026