नई दिल्लीः भारत के भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के एक अहम मिशन के दौरान सोमवार को अप्रत्याशित तकनीकी स्थिति सामने आई. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पुष्टि की कि प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के तीसरे चरण में एक असामान्य विचलन देखा गया. इस घटना ने मिशन के अंतिम परिणाम को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है.
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि मिशन से जुड़े सभी टेलीमेट्री और उड़ान डेटा का गहन अध्ययन किया जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मिशन को न तो पूरी तरह सफल और न ही असफल घोषित किया गया है. उनके अनुसार, “मिशन अपेक्षित प्रक्षेप पथ पर आगे नहीं बढ़ सका,” लेकिन अंतिम निष्कर्ष विश्लेषण के बाद ही साझा किया जाएगा.
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया. इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 सहित कुल 16 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाना था. यह उड़ान खास इसलिए मानी जा रही थी क्योंकि 2025 में PSLV की पिछली उड़ान विफल रही थी और C62 को उसकी वापसी मिशन के रूप में देखा जा रहा था.
इसरो के अनुसार, लॉन्च के शुरुआती मिनट बिल्कुल योजना के अनुरूप रहे. चार चरणों वाले रॉकेट के पहले और दूसरे चरण ने सामान्य प्रदर्शन किया. समस्या तीसरे चरण के दौरान सामने आई, जब रॉकेट के मार्ग में विचलन दर्ज किया गया. आमतौर पर PSLV के तीसरे चरण में आई किसी भी बड़ी गड़बड़ी से पूरे मिशन के उद्देश्यों पर गंभीर असर पड़ता है.
गौरतलब है कि 2025 में भी PSLV का एकमात्र प्रक्षेपण तीसरे चरण में आई समस्या के कारण असफल हो गया था. उस समय इसरो ने विफलता विश्लेषण समिति बनाई थी, लेकिन उसके निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए. ऐसे में C62 मिशन में फिर तीसरे चरण से जुड़ी समस्या सामने आना चिंता बढ़ाता है.
यदि मिशन को अंततः असफल घोषित किया जाता है, तो यह 64 PSLV उड़ानों में पांचवीं विफलता होगी. भले ही यह रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खराब न माना जाए, लेकिन इसका असर व्यापक हो सकता है. इस मिशन में ब्राजील, नेपाल और ब्रिटेन जैसे देशों के उपग्रह शामिल थे. इसके अलावा, हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनी ध्रुवा स्पेस के सात उपग्रह भी इसी रॉकेट पर सवार थे.
PSLV को भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष योजनाओं की रीढ़ माना जाता है. इसरो उद्योग-निर्मित पहले PSLV को लॉन्च करने की तैयारी में भी है. ऐसे में PSLV-C62 के अंतिम परिणाम का असर न सिर्फ इसरो, बल्कि निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर भी पड़ सकता है. फिलहाल, सभी की नजरें इसरो के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं.
First Updated : Monday, 12 January 2026