केरलम : साल 2018 के बाद केरलम में छठी बार निपाह वायरस का संक्रमण का फैला है। इस साल यह पहला केस सामने आया है। अस्पताल के अनुसार मरीज को हल्का बुखार आने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बाद में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज भेजा गया। उसकी हालत गंभीर है और वह वेंटिलेटर पर है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा, मरीज कई लोगों के संपर्क में आया था। अस्पताल के स्टाफ और उसके संपर्क में आए संभावित लोगों को क्वारंटीन रहने को कहा गया है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सावधानियां बरतने की सलाह भी दी है। दो साल पहले 2024 में दो केस मिले थे। इनमें एक की जान चली गई थी।
इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखने वाले अधिकारियों का कहा है कि मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और खुद उसकी सफाई की थी। आशंका है कि इसी दौरान वह संक्रमण की चपेट में आया। निपाह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट (फल खाने वाले चमगादड़ों) से फैलता है। मामला सामने आने के बाद अब मरीज का रूट मैप तैयार किया जा रहा है। उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है। सबसे महत्तवपूर्ण यह है कि NIV की रिपोर्ट आने के बाद आगे के कदम तय किए जाएंगे।
WHO के अनुसार साल 1998 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में पहली बार निपाह वायरस का पता चला था। इसी गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा। आमतौर पर यह वायरस चमगादड़ और सुअर से फैलता है।अगर इस वायरस से इन्फेक्टेड चमगादड़ किसी फल को खाता है और उसी फल-सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। आपको बता दें कि निपाह वायरस सिर्फ जानवरों से ही नहीं, बल्कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। यह लार, खून और बॉडी फ्लूइड से फैल सकता है।
निपाह वायरस के लक्षण दो से तीन दिन में दिखने लगते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
आपको बता दें कि फिलहाल निपाह वायरस की कोई वैक्सीन या विशेष दवा नहीं है। मरीज का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। समय पर पहचान और आइसोलेशन ही सबसे प्रभावी उपाय है। हालांकि निपाह वायरस की रोकथाम के लिए वैक्सीन और इलाज के दवाओं पर रिसर्च जारी है। First Updated : Thursday, 11 June 2026