लखनऊ के विकास नगर सेक्टर 14 में बुधवार शाम अचानक आग लग गई। यह इलाका रिंग रोड के किनारे है। खाली प्लॉट में सैकड़ों झोपड़ियां बनी हुई थीं। बताया जा रहा है कि आग अज्ञात कारणों से शुरू हुई। देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। कुछ ही मिनटों में आग ने बड़ी जगह को घेर लिया। धुआं दूर-दूर तक दिखने लगा। लोग घबराकर बाहर भागने लगे। किसी को समझ नहीं आया कि आग कैसे लगी।
आग लगने के बाद एक के बाद एक धमाके सुनाई दिए। यह धमाके सिलिंडर फटने के थे। झोपड़ियों में गैस सिलिंडर रखे हुए थे। धमाकों से आग और भड़क गई। तेज हवा ने भी आग को फैलने में मदद की। कुछ ही समय में करीब 500 झोपड़ियां आग की चपेट में आ गईं। लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से दिखाई दे रही थीं। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भागना शुरू किया।
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग चिल्लाते हुए बाहर निकले। कई परिवारों के सदस्य बिछड़ गए। कुछ लोग अपने बच्चों को ढूंढते नजर आए। कई झोपड़ियों में रहने वाले लोग सब कुछ छोड़कर भागे। लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। आसपास के मकानों को भी खतरा बढ़ गया। एहतियात के तौर पर करीब 50 घर खाली कराए गए।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग सक्रिय हुआ। अलग-अलग इलाकों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचीं। पुलिस भी मौके पर पहुंची। आग बुझाने के लिए चारों तरफ से पानी डाला गया। आसपास के होटल और इमारतों से भी पानी लिया गया। करीब तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया गया। बिजली सप्लाई भी बंद कर दी गई थी ताकि खतरा कम हो।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दमकल देर से पहुंची। इस वजह से आग ज्यादा फैल गई। कुछ लोगों की पुलिस से बहस भी हुई। मौके पर भीड़ बढ़ती गई। लोग वीडियो बनाने लगे। पुलिस को लोगों को हटाने के लिए सख्ती करनी पड़ी। हालात कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गए।
आग में कई लोग घायल हुए हैं। हालांकि अधिकारियों ने किसी की मौत की पुष्टि नहीं की है। लेकिन कुछ परिवारों ने अपने बच्चों के लापता होने की बात कही है। एक व्यक्ति ने बताया कि उसके बच्चे अंदर ही रह गए। एक अन्य ने भी बच्चों के गायब होने की बात कही। इससे डर और बढ़ गया है। राहत टीम अब भी तलाश में जुटी है।
फिलहाल आग लगने के कारण साफ नहीं हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस हादसे ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी बस्तियों में ऐसे हादसे बड़ा खतरा बन सकते हैं। आने वाले समय में प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। First Updated : Wednesday, 15 April 2026