ट्विशा शर्मा केस में बड़ा खुलासा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिले चोटों के निशान, CBI ने HC से मांगी गिरिबाला सिंह की कस्टडी

ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच तेज हो गई है. CBI और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कई बड़े दावे किए हैं, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत से पहले चोट लगने की बात सामने आई है. परिवार की मांग पर दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

मध्यप्रदेश: भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है. इस हाई-प्रोफाइल केस में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने हाईकोर्ट में बड़ा दावा करते हुए आरोपी सास गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई है. साथ ही जांच एजेंसी ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग भी उठाई है.

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी अदालत में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और ट्विशा शर्मा के शरीर पर मिले चोटों के निशानों को लेकर अहम जानकारी साझा की. सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि शरीर पर कई ऐसी चोटें मिली हैं, जो मौत से पहले लगी थीं और किसी लड़ाई या हाथापाई की ओर इशारा कर सकती हैं.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आई अहम जानकारी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बताया कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कलाई, कोहनी, सिर समेत कई हिस्सों में चोटों के निशान पाए गए थे. इस दौरान अदालत ने सवाल किया कि क्या ये चोटें मौत से पहले की थीं? इस पर राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कुछ चोटें एंटी-मॉर्टम थीं, यानी ये चोटें मौत से पहले लगी थीं. सरकार ने यह भी कहा कि ये निशान न तो मौत के बाद लग सकते थे और न ही शव को नीचे उतारते समय बने होंगे. सरकारी पक्ष के मुताबिक, ये चोटें किसी संघर्ष या हाथापाई के दौरान लगने की आशंका को मजबूत करती हैं.

बहन के बयान में दहेज मांग का आरोप

राज्य सरकार ने अदालत में ट्विशा शर्मा की बहन का बयान भी पढ़कर सुनाया. बयान के मुताबिक, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने उसे अपने घर बुलाया था और 2 लाख रुपये की मांग की थी. कोर्ट को यह भी बताया गया कि ट्विशा से कहा गया था कि उसके परिवार ने शादी में पर्याप्त खर्च नहीं किया. मामले में दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

पति और सास के खिलाफ दर्ज है FIR

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत, दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ FIR दर्ज की है. एफआईआर में ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है.

बचाव पक्ष ने जांच में सहयोग का दावा किया

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह की ओर से उनके वकील ने भी अपनी दलीलें पेश कीं. उन्होंने अदालत को बताया कि ट्विशा को फंदे से लटका पाए जाने के 20 मिनट के भीतर ही AIIMS भोपाल पहुंचा दिया गया था. वकील ने कहा कि 13 मई की सुबह से पूरे परिसर को पुलिस ने सील कर दिया था. उन्होंने यह भी बताया कि गिरिबाला सिंह ने खुद जब्ती मेमो पर हस्ताक्षर किए थे. बचाव पक्ष ने अदालत में कहा, वे यह नहीं कह सकते कि मैंने नोटिस का पालन नहीं किया. मैं पूरे दिन उनके लिए उपलब्ध थी.

नोटिस को लेकर दोनों पक्षों में विवाद

बचाव पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 14 मई को कोई नोटिस नहीं मिला था. वहीं राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह को 13 और 14 मई को नोटिस भेजे गए थे, लेकिन जब पुलिस उनके घर पहुंची तो वह वहां मौजूद नहीं थीं. सरकार ने कहा कि जमानत देते समय कोर्ट ने जांच में सहयोग करने और सबूतों से छेड़छाड़ न करने जैसी शर्तें लगाई थीं.

गिरिबाला सिंह के रवैये पर उठे सवाल

राज्य सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह का रवैया कई सवाल खड़े करता है. सरकारी पक्ष के अनुसार, उन्होंने ट्विशा शर्मा पर कई बेबुनियाद आरोप लगाए थे. फिलहाल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और CBI पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है.

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