पुणे: 4 साल की बच्ची का रेप-मर्डर करने वाले दोषी को मिली फांसी, कोर्ट ने कहा- कानून के तहत यही सबसे कठोर सजा
पुणे में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी को मृत्युदंड सुनाया है. अदालत ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सबसे कठोर सजा मृत्युदंड है और इसी कारण यह सजा सुनाई जा रही है.

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला है. अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में सख्त से सख्त सजा की आवश्यकता होती है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.
सोमवार, 29 जून को पुणे की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश एस.आर. सालुंके ने इस मामले में फैसला सुनाया. अदालत ने 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा दी. फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने कहा कि यह अपराध इतना जघन्य है कि केवल आजीवन कारावास पर्याप्त नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सबसे कठोर सजा मृत्युदंड है और इसी कारण यह सजा सुनाई जा रही है.
अदालत में मौजूद रहे पीड़ित परिवार के सदस्य
फैसले के दौरान बच्ची के परिवार के सदस्य भी अदालत में मौजूद थे. लंबे समय तक न्याय का इंतजार करने के बजाय इस मामले की सुनवाई तेज गति से पूरी की गई, जिससे परिजनों को अपेक्षाकृत कम समय में अदालत का फैसला मिल सका. इस फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी.
मई में हुई थी वारदात
यह मामला मई 2026 का है. पुणे जिले के भोर तालुका के नसरपुर क्षेत्र में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था और पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की थी. जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी भीमराव कांबले को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ विभिन्न साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए.
कुछ ही हफ्तों में पूरी हुई सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई. अदालत ने 25 जून को आरोपी को दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद 29 जून को अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषी को मृत्युदंड की सजा दी. इस तरह गिरफ्तारी से लेकर सजा सुनाए जाने तक की पूरी प्रक्रिया करीब एक महीने के भीतर पूरी हो गई.
इस मामले को हाल के समय की सबसे तेज न्यायिक प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है. पुलिस जांच, साक्ष्य जुटाने और अदालत में सुनवाई सभी चरण अपेक्षाकृत कम समय में पूरे किए गए. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर अपराधों में समयबद्ध सुनवाई से पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है. हालांकि, मृत्युदंड का अंतिम क्रियान्वयन कानून के अनुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद ही संभव होगा.


