'थोड़ी शर्म और हिम्मत दिखाओ', यूसुफ पठान पर महुआ मोइत्रा का तीखा हमला

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर पार्टी के बागी गुट का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की, जबकि पार्टी के कई सांसदों के अलग रुख अपनाने से अंदरूनी कलह और बढ़ गई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि पठान पार्टी के भीतर उभरे असंतुष्ट गुट के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के लोकसभा सांसदों के एक बड़े समूह के अलग रुख अपनाने की खबरों ने पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों की चर्चाओं को और हवा दे दी है.

यूसुफ पठान की आलोचना

कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से यूसुफ पठान की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें उन लोगों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने उन्हें भारी समर्थन देकर संसद तक पहुंचाया. उन्होंने पठान से राजनीतिक दृढ़ता दिखाने की अपील की और उनके क्रिकेट करियर का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने मैदान पर साहस दिखाया था, उसी तरह राजनीति में भी स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए.

टीएमसी इस समय अपने गठन के बाद के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक का सामना कर रही है. पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक दिशा को लेकर लगातार मतभेद सामने आ रहे हैं. महुआ मोइत्रा पहले भी पार्टी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं की आलोचना कर चुकी हैं और उन्होंने ऐसे नेताओं को ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे राजनीति करने वाला बताया था.

इसी बीच यूसुफ पठान भी हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बहरामपुर लोकसभा सीट छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी ताकि भविष्य में वहां से किसी बड़े नेता को चुनाव मैदान में उतारा जा सके. हालांकि इन दावों को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और संबंधित नामों ने ऐसी खबरों को खारिज भी किया.

यूसुफ पठान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी. उनकी जीत को टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण माना गया था क्योंकि लंबे समय बाद पार्टी को बहरामपुर सीट पर सफलता मिली थी.

इस बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें और तेज हो गईं जब कई लोकसभा सांसदों द्वारा अलग राजनीतिक रुख अपनाने की चर्चा सामने आई। बताया जा रहा है कि कुछ सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने के पक्ष में हैं. हालांकि बागी खेमे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पार्टी छोड़ने का कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है और वे अलग संसदीय पहचान के साथ अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखना चाहते हैं.

टीएमसी की विधानसभा इकाई में मतभेद

उधर, टीएमसी की विधानसभा इकाई में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं. कुछ नेताओं ने संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर अलग राय व्यक्त की है, जिससे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर चल रही खींचतान पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है.

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