गाजियाबाद में बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, आतंकी संगठनों से जुड़े 5 नाबालिग समेत 9 संदिग्ध गिरफ्तार

गाजियाबाद में एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जिसमें 5 नाबालिग समेत 9 लोग गिरफ्तार किए गए. आरोपी संवेदनशील ठिकानों की जानकारी विदेश भेजते थे और इसके बदले पैसे लेते थे.

Shraddha Mishra

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. कौशांबी इलाके में देशविरोधी गतिविधियों में शामिल एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें न केवल वयस्क बल्कि नाबालिग भी शामिल पाए गए हैं. पहले पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद एसआईटी ने कार्रवाई तेज करते हुए 9 और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं.

पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और सीसीटीवी कैमरे जैसे उपकरण बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल जासूसी गतिविधियों में किया जा रहा था. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से आपस में जुड़ा हुआ था. इन ग्रुप्स के जरिए उन्हें निर्देश दिए जाते थे और जानकारी साझा की जाती थी. आरोपी देश के संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें, वीडियो और लोकेशन इकट्ठा कर विदेश में बैठे लोगों तक पहुंचाते थे.

कई देशों से जुड़े है तार

इस जासूसी नेटवर्क के तार सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुबई, मलेशिया और यूके जैसे देशों से भी जुड़े हुए पाए गए हैं. मुख्य संचालक सीमा पार से इस पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था. कुछ प्रमुख संदिग्ध अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है. 

फर्जी सिम और तकनीक का इस्तेमाल

गिरोह के सदस्य फर्जी पहचान और प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे. लोकेशन और अन्य जानकारी साझा करने के लिए अलग-अलग मोबाइल एप्स का सहारा लिया जाता था. इससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर रखी थी. उन्होंने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कबूल की है. गिरोह की योजना देशभर में करीब 50 जगहों पर इस तरह के कैमरे लगाने की थी, ताकि लगातार निगरानी की जा सके. 

पैसे के बदले कर रहे थे जासूसी

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को उनके काम के बदले पैसे दिए जाते थे. यह रकम सीधे खाते में भेजने के बजाय जनसेवा केंद्रों या दुकानों के क्यूआर कोड के जरिए ट्रांसफर की जाती थी, ताकि लेन-देन का पता न चल सके. कुछ मामलों में हवाला का भी इस्तेमाल किया गया. इस नेटवर्क का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें युवाओं और नाबालिगों को खासतौर पर शामिल किया जा रहा था. उन्हें तकनीकी कामों के लिए चुना जाता था और धीरे-धीरे इस नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता था.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शास्त्री नगर निवासी गगन कुमार, जैनपुर के दुर्गेश, मेरठ के परतापुर निवासी गणेश और बिहार के पूर्णिया निवासी विवेक समेत अन्य के रूप में हुई है. वहीं, आरोपियों में गाजियाबाद, कौशांबी और मेरठ के रहने वाले 5 नाबालिग भी शामिल हैं. अधिकांश आरोपी कम शिक्षित हैं, जबकि एक आरोपी अनपढ़ है.

कई राज्यों में फैला असर

पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह की गतिविधियां सिर्फ गाजियाबाद तक सीमित नहीं थीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक फैली हुई थीं. इसके बाद इन राज्यों में भी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है. पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और इसके कई और लिंक सामने आ सकते हैं.

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