ईरान को मिलेगा धोखा, पुतिन ने ट्रंप को दिया तगड़ा ऑफर! रूस के ‘डबल गेम’ से बढ़ी हलचल

मध्य पूर्व संकट के बीच रूस ने अमेरिका को प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान को खुफिया मदद रोक सकता है, बशर्ते अमेरिका यूक्रेन में समर्थन घटाए. इस संभावित सौदे ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अब वैश्विक राजनीति भी तेजी से करवट लेती दिख रही है. जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस की भूमिका को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं कि दोस्ती और रणनीति के बीच संतुलन साधते हुए रूस अपने फायदे के लिए बड़ा फैसला ले सकता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अब अपनी पुरानी नीति से हटकर नया रास्ता अपनाने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि रूसी नेतृत्व अमेरिका के साथ एक समझौते की संभावना तलाश रहा है. इस प्रस्ताव के तहत रूस ने संकेत दिया है कि वह ईरान के साथ अपनी करीबी कम कर सकता है, लेकिन इसके बदले अमेरिका को यूक्रेन में अपनी सैन्य मदद सीमित करनी होगी. यह प्रस्ताव भले ही आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन इसकी चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है.

खुफिया जानकारी बना ‘सौदेबाजी का हथियार’

बताया जा रहा है कि अब तक रूस अपने सैटेलाइट सिस्टम के जरिए ईरान को अहम खुफिया जानकारी देता रहा है. इसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों की स्थिति और संभावित हमलों की जानकारी शामिल थी. इसी जानकारी के आधार पर ईरान अपनी रणनीति तैयार करता था. अब रूस इसी सहयोग को अपने लिए एक ‘टूल’ की तरह इस्तेमाल कर अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है.

अमेरिका के सामने मुश्किल फैसला

इस प्रस्ताव ने अमेरिका के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ यूक्रेन को समर्थन जारी रखना है, तो दूसरी तरफ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को संभालना भी जरूरी है. हालांकि शुरुआती तौर पर अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन इससे जुड़े संकेतों ने यूरोप और अन्य देशों की चिंता जरूर बढ़ा दी है.

रूस के इस कदम से यूरोपीय देशों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. उन्हें डर है कि अगर अमेरिका और रूस के बीच कोई समझौता होता है, तो नाटो की भूमिका कमजोर पड़ सकती है. पहले से ही कुछ मुद्दों पर अमेरिका और नाटो देशों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं, जिससे यह स्थिति और जटिल हो गई है.

ईरान के लिए बड़ा झटका

ईरान के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. अब तक वह रूस को अपना मजबूत सहयोगी मानता रहा है और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग भी रहा है. लेकिन अगर रूस ने खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया, तो ईरान की रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिकी और इजरायली हमलों का सामना करना उसके लिए और मुश्किल हो जाएगा.

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