MLC चुनाव प्रक्रिया शुरू होते है हीं समीकरण, गणित और खेल शुरू, कहीं फंस ना जाएं तेजस्वी!

1 जून से बिहार के सियासत में हलचल तेज हो गई है। आज से एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया की शुरूआत हो गई है। 9 सीटों पर चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव होने हैं। इस बार का यह चुनाव थोड़ा दिलचस्प हो गया है..क्योंकि जिस तरह से एनडीए ने जीत हासिल कर दो सौ से ज्यादा सीटों पर कब्जा किया उससे यह लग रहा है कि बिहार में विपक्षी को इस चुनाव में कही पूरी तरह से मुंह की खानी पड़ेगी। सीटों के समीकरण से इसको समझने की कोशिश करते हैं।

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बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर कैडिडेट किस्मत आजमाएंगे। इन दस सीटों में नौ पर चुनाव और एक पर उपचुनाव होने हैं जो नीतीश कुमार के राज्य सभा जाने से खाली हुआ है। नीतीश कुमार वाली सीट पर अभी चार साल बचे हुए हैं इसलिए इस पर उपचुनाव होने जा रहा है। नीतीश कुमार के इस सीट से उनके बेटे निशांत कुमार लड़ भी सकते हैं और नहीं भी लड़ सकते हैं। नीतीश के बेटे निशांत अभी बिहार में स्वास्थ्य मंत्री हैं और उन्हें अगर दो हजार तीस में विधान सभा चुनाव लड़वाना है तो फिर उन्हें नीतीश वाली सीट पर चुनाव लड़ाया जा सकता है और अगर नहीं तो फिर उन्हें दूसरी सीट से चुनाव लड़वाया जाएगा ताकि उसका कार्यकाल 6 सालों तक रहे। अब जरा समझिए सीटों का समीकरण कैसे इसमें काम करेगा। नीतीश की सीट पर उप चुनाव है तो उसकी प्रक्रिया अलग है। विधान सभा में अपार बहुमत की वजह  से एनडीए की यही सीट पक्की है। आपको बता दें कि इस साल चार जेडीयू के दो बीजेपी और आरजेडी, एक सीट कांग्रेस  की खाली हो रही है यानी इन पार्टियों के विधान पार्षद का कार्यकाल 28 जून तक खत्म हो जाएगा। बीजेपी के सम्राट चौधरी और संजय मयूख, जेडीयू के श्री भगवान सिंह कुशवाहा, गुलाम गौस, भीष्ण सहनी और कुमुद वर्मा, राजद के सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारुक और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह शामिल हैं। 

9 सीटों पर होगा खेल!

नीतीश कुमार वाली सीट यानी 10 वीं सीट पर एनडीए की जीत तय के साथ 9 सीटों पर असल खेल होगा। विधानसभा में सदस्यों की संख्या 243 है इसलिए नियम को 243 के आधार पर समझते हैं। चुनाव में वोटिंग का आधार वोट डालने वाले विधायकों की संख्या से तय होता है। 243 सीटों की विधानसभा में 9 सीटों के लिए चुनाव है तो नियम के अनुसार जीत कोटा वोट डालने वाले विधायकों की संख्या से तय होगा। अब जरा इस चुनावी खेल को स मझने की कोशिश करते हैं 243 विधायक वोट डालने जाते हैं तो 243 को 100 गुणा करके उस नंबर को चुनावी सीट संख्या 9 में एक जोड़कर यानी 10 से भाग देने पर। ऐसा करने पर नंबर आता है 2430। इसमें 1 जोड़ देंगे तो संख्या होगी 2431। जीत के लिए एक कैंडिडेट के वोट का कोटा 2431 होगा। विधायकों की पहली वरीयता के 1 वोट की कीमत 100 होगी। एक सीट जीतने के लिए कैंडिडेट को कम से कम 2431 वोट चाहिए। सीधी संख्या में 25 विधायकों के समर्थन से एक सीट निकलेगी। 

MLC चुनाव में क्या है जेडीयू का प्लान ?

विधान सभा में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी-आर, हम रालोमो को मिलाकर 202 सदस्य हैं तो 25 विधायक के हिसाब से एनडीए के 200 विधायक पहली वरीयता के वोट से 8 सीट जीत लेंगे। विपक्ष में आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6 सीपीआई-माले के 2 सीपीएम और आईआईपी के 1-1 एमएलए महागठबंधन का हिस्सा हैं। असुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के 1 विधायक भी विपक्ष में हैं। विपक्ष में 41 विधायक हैं तो 1 सीट विपक्ष का पहली वरीयता के वोट से कोई एक कैंडिडेट जीत सकता है। सत्ता के पास 8 सीट जीतने के बाद 2 विधायक का वोट बचेगा जबकि विपक्ष के पास 16 विधायक का वोट। इससे ना तो सत्ता पक्ष नौवीं सीट जीत सकता है और ना विपक्ष दूसरी सीट निकाल सकता है। अब जब पहली वरीयता के मत से सारी 9 सीटों का नतीजा तय नहीं हो पाएगा तो जिनको कोटा का वोट मिल गया उनको विजयी घोषित करके दूसरे राउंड की गिनती शुरु होगी। पहले राउंड में जीते कैंडिडेट को मिले विधायकों के बैलेट में दूसरी वरीयता के मत को जोड़ा जाएगा। इस प्रक्रिया में दूसरी वरीयता के एक वोट का मूल्य तय करके उसे जोड़ा जाता है। विधान परिषद के चुनाव में सत्ता पक्ष के पास एक्स्ट्रा वोट 2 ही है। विपक्ष के पास 16 वोट एक्स्ट्रा हैं। सत्ता पक्ष विपक्ष में इतनी बड़ी तोड़-फोड़ नहीं कर पाएगा कि वो 2 को 25 के वैल्यू तक पहुंचा सके। वहीं विपक्ष में इतनी संभावना नहीं है कि सत्ता पक्ष के विधायक क्रॉल वोटिंग करके उसे दूसरी वरीयता के वोट से दूसरी सीट दिला दें। कुल मिलाकर बिहार विधान सभा का समीकरण ये बताता है कि 9 सीटों के चुनाव के लिए 10वां कैंडिडेट नहीं उतरता है तो 8 सीट एनडीए और 1 सीट महागठबंध जीत सकता है। और दोनों सत्ता पक्ष और विपक्ष ने दसवां कैंडिडेट उतारा तो फिर तय मानिए खेल होना तय है।   First Updated : Monday, 01 June 2026

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